सिलीगुड़ी | पीबी टीवी पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में आयोजित 'अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन' में शामिल होने पहुँचीं भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एक बयान ने प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। राज्य प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति ने सार्वजनिक मंच से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए।
सुरक्षा के नाम पर अड़ंगा: कार्यक्रम का बदला गया था स्थान
विवाद की जड़ कार्यक्रम का स्थल रहा। मूल रूप से यह सम्मेलन विधाननगर (फांसीदेवा) में होना तय था, लेकिन ऐन वक्त पर राज्य प्रशासन ने 'सुरक्षा कारणों' का हवाला देते हुए वहां अनुमति देने से इनकार कर दिया। मजबूरन आयोजकों को कार्यक्रम बागडोगरा एयरपोर्ट अथॉरिटी के मैदान में स्थानांतरित करना पड़ा।
मैदान में अचानक पहुँचीं राष्ट्रपति, प्रशासन के दावों की खुली पोल
बागडोगरा में अपना संबोधन समाप्त करने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू का काफिला अचानक उसी विधाननगर मैदान की ओर मुड़ गया, जिसे प्रशासन ने 'असुरक्षित' बताया था। वहां हजारों की संख्या में मौजूद लोगों के बीच पहुँचकर उन्होंने जमीनी हकीकत देखी और प्रशासन के तर्कों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मुझे बताया गया था कि यहाँ जगह की कमी है, लेकिन मैं देख रही हूँ कि यहाँ लाखों लोग समा सकते हैं। मैं यहाँ आना चाहती थी और मैं आ गई,।
भावुक अपील: "मैं भी बंगाल की ही बेटी हूँ"
विधाननगर में जनता से रूबरू होते हुए राष्ट्रपति काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ अपने व्यक्तिगत रिश्तों का हवाला देते हुए पूछा:
"मैं भी इसी बंगाल की बेटी हूँ।"
"ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन की तरह हैं, फिर भी मुझे समझ नहीं आता कि वह मुझसे इतनी नाराज क्यों हैं?"
"एक सांस्कृतिक और सामुदायिक आयोजन में इस तरह की बाधाएं क्यों डाली गईं?"
सियासी गलियारों में हड़कंप
राष्ट्रपति का यह सीधा हमला राज्य सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक पेचीदगियों के नाम पर सामुदायिक सम्मेलनों को रोकना दुर्भाग्यपूर्ण है। स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ने पाया कि सुरक्षा का हवाला केवल एक बहाना था, जबकि धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत थी।

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