ठाकुर अनुकूलचंद्र जी की 138वीं जयंती पर भव्य आयोजन; कोयलांचल के 30 हजार भक्तों ने ग्रहण किया महाप्रसाद
- आयोजन: श्री श्री ठाकुर अनुकूलचंद्र जी की 138वीं जन्म जयंती
- प्रमुख उपस्थिति: रानीगंज, अंडाल, उखड़ा, जामुड़िया और पांडवेश्वर के हजारों भक्त
- विशेष आकर्षण: देवघर के सपन मंडल का भजन कीर्तन और विशाल खिचड़ी भोग
- लक्ष्य: युवा पीढ़ी को ठाकुर जी के दर्शन से जोड़ना
रानीगंज: परम प्रेममय श्री श्री ठाकुर अनुकूलचंद्र जी की 138वीं जन्म जयंती के पावन अवसर पर रानीगंज के ऐतिहासिक सियारसोल राजबाड़ी मैदान में आयोजित तीन दिवसीय 'प्रियबोधी महोत्सव' का रविवार को गरिमामय समापन हुआ. इस महोत्सव ने पूरे कोयलांचल क्षेत्र के भक्तों को एकजुटता के सूत्र में पिरो दिया.रानीगंज, अंडाल, उखड़ा, जामुड़िया, डोबराना और पांडवेश्वर समेत विभिन्न अंचलों से आए लगभग 30 हजार अनुयायियों की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया.
भक्ति और अनुष्ठान का संगम
महोत्सव के मुख्य दिन यानी रविवार को सियारसोल मैदान में तीन विशाल और भव्य पंडाल सजाए गए थे. कार्यक्रम की शुरुआत भोर 5:00 बजे 'उषा कीर्तन' से हुई, जिसके बाद सुबह 6:30 बजे सामूहिक प्रार्थना सभा आयोजित की गई. दोपहर में देवघर सत्संग से आए प्रसिद्ध भजन गायक सपन मंडल ने ठाकुर जी की महिमा पर आधारित भक्ति संगीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.शाम के सत्र में ठाकुर जी द्वारा रचित पवित्र ग्रंथों का पाठ किया गया और विद्वान वक्ताओं ने उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला.
सामूहिक एकता का प्रतीक: प्रियबोधी महोत्सव
आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए वरिष्ठ भक्त प्रकाश मंडल ने बताया कि पहले अलग-अलग क्षेत्रों में छोटे स्तर पर कार्यक्रम होते थे, लेकिन इस बार सभी भक्तों ने मिलकर एक भव्य केंद्रीय महोत्सव करने का निर्णय लिया. इस संस्था के क्षेत्रीय अध्यक्ष डॉ. सुप्रिय गोप और सचिव उत्पल माजी के नेतृत्व में यह आयोजन सफल रहा.
30 हजार भक्तों का भंडारा और विशेष 'भोग'
भक्त तुहिन दास ने बताया कि इस महोत्सव का सबसे खास आकर्षण 'आनंद बाजार' (भंडारा) रहा. उन्होंने जानकारी दी कि भक्तों के लिए विशेष रूप से दलिया, खिचड़ी और चटनी का भोग तैयार किया गया था. प्रबंधन की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक-एक कड़ाही में 1500 लोगों के लिए खिचड़ी तैयार की जा रही थी. सैकड़ों माताएं और स्वयंसेवक पिछले दो दिनों से इस सेवा कार्य में जुटे हुए थे.
युवा पीढ़ी को जोड़ने की पहल
महोत्सव की शुरुआत शुक्रवार को बच्चों के लिए आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता से हुई थी, जिसमें 200 से अधिक नन्हे कलाकारों ने हिस्सा लिया. प्रकाश मंडल ने कहा कि शाम के सत्र में ग्रंथ पाठ और चर्चा का मुख्य उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को ठाकुर जी के आदर्शों और उनके द्वारा दिखाए गए मानवता के मार्ग से अवगत कराना है.
भजनों की धुन पर नाचते-गाते भक्तों और ठाकुर जी के जयकारों से पूरा सियारसोल क्षेत्र गुंजायमान रहा. इस महोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रदर्शित किया, बल्कि आपसी प्रेम और सामाजिक समरसता का एक अनूठा उदाहरण भी पेश किया.


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