तार बंगला और शिशु बागान के बस स्टैंड पर गंदगी और अराजकता का आलम; स्थानीय लोगों ने प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग
रानीगंज: पूर्व विधायक सोहराब अली द्वारा 'विधायक इलाका उन्नयन प्रकल्प' के तहत रानीगंज के तार बंगला और शिशु बागान इलाकों में निर्मित बस स्टैंड अब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं. समय पर उचित रखरखाव न होने के कारण इन दोनों बस स्टैंडों की हालत इतनी दयनीय हो गई है कि ये यात्रियों के लिए सहूलियत की जगह 'सरदर्द' बन चुके हैं.
स्थिति बेहद चिंताजनक
वर्तमान स्थिति को देखते हुए, बस स्टैंड पर यात्रियों का रुकना बेहद मुश्किल हो गया है. स्थानीय निवासी विजय कुमार ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि बस स्टैंड की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि अब बसें स्टैंड के सामने रुकती ही नहीं हैं, बल्कि थोड़ा आगे रुकती हैं क्योंकि यात्री यहाँ रुकने से कतराते हैं.
उन्होंने बस स्टैंड की बदहाली का पूरा ब्यौरा देते हुए कहा की बस स्टैंड की फॉल्स सीलिंग टूट चुकी है. बिजली की सुविधा होते हुए भी लाइटें काम नहीं करती. बस स्टैंड पर लगी कुर्सियाँ (चेयर) चोरी हो चुकी हैं, और जो बची हैं वे भी टूटी-फूटी हालत में हैं,लोहे की लगी कुर्सियां ईंट पर टिकाए गए है,अगर कोई सावधानी से उसपर नहीं बैठते है,तो हाथ पैर टूट सकती है. यहाँ साफ-सफाई बिल्कुल नहीं की जाती, जिसके कारण गंदगी का अंबार लगा रहता है.
रात में बन जाते हैं शराबियों और नशाखोरों का अड्डा
विजय कुमार ने सबसे चिंताजनक पहलू पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रात होते ही ये दोनों बस स्टैंड शराबियों और नशा करने वालों का अड्डा बन जाते हैं. इस कारण इस क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं, जिससे यात्री और स्थानीय लोग शाम के बाद यहाँ असुरक्षित महसूस करते हैं.
शहर की छवि हो रही खराब
स्थानीय लोगों का कहना है कि ये बस स्टैंड केवल स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि रानीगंज की छवि के लिए भी बुरा बन रहे हैं. "जब रानीगंज से बाहर के लोग शहर आते हैं और इन बदहाल बस स्टैंडों को देखते हैं, तो उनके मन में शहर के बारे में एक खराब धारणा बन जाती है."
प्रशासन और वर्तमान विधायक से अपील
स्थानीय निवासियों ने वर्तमान विधायक तापस बनर्जी सहित प्रशासन के अन्य लोगों से तत्काल इस विषय पर ध्यान देने का अनुरोध किया है. उनकी मांग है कि इन बस स्टैंडों की मरम्मत, लाइटिंग, साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए, ताकि जो ढाँचा लोगों की सहूलियत के लिए बनाया गया था, वह वास्तव में उनके काम आ सके.
इस मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई क्या होती है, यह देखने लायक होगा.



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