जामुड़िया के खेपाडांगा आदिवासी पाड़ा के ग्रामीणों का आंदोलन; ईसीएल प्रबंधन पर मनमानी का आरोप
जामुड़िया: ईसीएल केंदा एरिया अंतर्गत न्यू केंदा कोलियरी के न्यू केंदा ओसीपी (पैच) क्वारी 3 का काम शनिवार सुबह से स्थानीय खेपाडांगा आदिवासी पाड़ा के ग्रामीणों द्वारा बंद करा दिया गया.ग्रामीणों ने ईसीएल प्रबंधन पर मनमाने तरीके से जमीन काटने और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित करने की मांग पूरी न करने का आरोप लगाते हुए यह आंदोलन शुरू किया है.
ग्रामीणों की मुख्य मांगें:
आंदोलन में शामिल ग्रामीण रिक्की बाउरी, सिकंदर टुडू, राखोहरि हांसदा, और मंगल हेंब्रम ने बताया कि ईसीएल प्रबंधन द्वारा ओसीपी क्वारी 3 का काम तो तेजी से चलाया जा रहा है, लेकिन ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास देने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है.
ग्रामीणों ने दो प्रमुख मुद्दे उठाए जिनमे उन्होंने कहा कि वे वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं, इसलिए ईसीएल प्रबंधन की यह पूर्ण जिम्मेदारी है कि उन्हें सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित किया जाए. ग्रामीणों ने बताया कि ओसीपी के बगल में स्थित खेपाडांगा तालाब है, जिसका उपयोग खेपाडांगा और ईस्ट केंदा के लोग स्नान और पारंपरिक छठ पूजा के लिए करते हैं. ओसीपी के कारण तालाब का पानी धीरे-धीरे सूख रहा है. ग्रामीणों ने प्रबंधन से एक नए तालाब का निर्माण करने की मांग की है, जिस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
ग्रामीणों ने साफ कहा कि ईसीएल प्रबंधन कोयला उत्पादन के लिए ओसीपी चलाए, लेकिन उनकी वाजिब मांगों को पूरा करना होगा, अन्यथा विरोध जारी रहेगा.
प्रबंधन का प्रयास विफल
न्यू केंदा ओसीपी क्वारी 3 का काम बंद होने की सूचना पाकर ईसीएल न्यू केंदा कोलियरी ग्रुप ऑफ माइंस के एजेंट प्रदीप कुमार विश्वास, सुरक्षा प्रभारी विनोद कुमार, खनन कंपनी सीएमएटी के प्रबंधक हीरू बेग, और तृणमूल कांग्रेस नेता सुकुमार भट्टाचार्य मौके पर पहुँचे.उन्होंने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे, जिसके कारण सभी अधिकारी बैरंग वापस लौट गए.
वहीं इस विषय पर न्यू केंदा ग्रुप ऑफ माइंस के एजेंट प्रदीप कुमार विश्वास ने कहा कि ग्रामीणों की वाजिब मांगों को पूरा करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है.उन्होंने कहा कि ओसीपी के लिए जो भी जमीन काटी जा रही है, वह ईसीएल की जमीन है.उन्होंने ग्रामीणों के साथ जल्द बैठक कर आपसी समझौते के माध्यम से ओसीपी का काम शुरू कराने का आश्वासन दिया है.
फिलहाल, ग्रामीणों के विरोध के कारण ओसीपी का काम बंद पड़ा हुआ है और सभी मशीनें व डंपर खड़े हैं.










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