स्कॉलरशिप स्कैम: फर्जीवाड़ा करके हासिल किया सरकारी स्कॉलरशिप, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय एक्शन मोड में



 राज्य के 16 जिला के डीएम को दिया गया जांच का आदेश, 142 संस्थान के 1701 लाभार्थी पाये गये फर्जी

 कैमेलिया इंस्टिट्यूट ने 56 फर्जी विद्यार्थियों के खिलाफ दर्ज करायी प्राथमिकी, संस्थान का नाम उपयोग कर हासिल किया था स्कॉलरशिप का फंड


वर्ष 2021-22 और 2022-23 सत्र में हुआ है यह स्कैम, संस्थानों का भौतिक निरीक्षण करके लाभार्थियों की वास्तविकता पता लगाने का निर्देश शिवशंकर ठाकुर.

आसनसोल. पश्चिम बंगाल में स्कॉलरशिप स्कैम (छात्रवृति घोटाला) को लेकर राज्य के 16 जिला में खलबली मची हुई है. केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय इस मामले को लेकर एक्शन मोड है और विश्लेषण के बाद 142 संस्थानों को संदिग्ध के रूप में चिन्हित किया, जहां से वर्ष 2021-22 और 2022-23 सत्र में 1701 लाभार्थियों ने फर्जी तरीके से स्कॉलरशिप का फंड प्राप्त किया है. अल्पसंख्यक मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी आदित्य एस. सिंह ने इसे लेकर राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण के विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजा और संदिग्ध संस्थानों की जांच कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है. जिसके उपरांत पश्चिम बंगाल अल्पसंख्यक विभाग और वित्त निगम के प्रबंध निदेशक ने राज्य के 16 जिला के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर संदिग्ध संस्थानों की भौतिक निरीक्षण करके लाभार्थियों की वास्तविकता पता लगाने और किसी भी प्रकार धोखाधड़ी या गबन की स्थिति में संस्थानों तथा लाभार्थियों पर कानूनी कार्रवाई करने को कहा है. इस मामले में जांच शुरू होते ही पूर्व बर्दवान जिला में स्थिति कैमेलिया इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी ने 56 फर्जी विद्यार्थियों के नाम पर बुदबुद थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी. इन विद्यार्थियों ने कैमेलिया इंस्टिट्यूट के नाम का उपयोग करके स्कॉलरशिप हासिल किया था. पुलिस इसकी जांच में जुट गयी है. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह काफी बड़ा घोटाला है. इसकी जांच का दायित्व संभवतः वित्तीय अपराध निदेशालय को दिया जा सकता है. 

गौरतलब है कि आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े विद्यार्थियों को सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओ के तहत स्कॉलरशिप प्रदान की जाती है. यह राशि 15 हजार रुपये से शुरू करके तीन लाख तक हो सकती है. इस राशि को लेकर फर्जीवाड़ा हुआ है. वर्ष 2021-22 और 2022-23 सत्र में आवंटित फंड को लेकर जांच के दौरान अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने गड़बड़ी पायी. जिसके बाद संस्थानों और लाभार्थियों की जांच शुरू हुई. जिसमें 142 संस्थानों के 1701 लाभार्थियों का नाम सामने आया, जिन्होंने फर्जी तरीके से स्कॉलरशिप का फंड हासिल किया. 


कौन से हैं 16 जिला जिनके जिलाधिकारी को जांच के लिए भेजी गयी चिट्ठी

जिन 16 जिला के जिलाधिकारियो को संदिग्ध संस्थानों की जांच करने को कहा गया है, उसमें बांकुड़ा, पूर्व बर्दवान, नॉर्थ 24 परगना, पूर्व मेदिनीपुर, हावड़ा, साउथ 24 परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, हुगली, पुरुलिया, जलपाईगुड़ी, मालदा, कोलकाता, पश्चिम बर्दवान और पश्चिम मेदिनीपुर शामिल है. पुलिस सूत्रों के अनुसार इन जिलों के स्थित पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेजों में यह घोटाला हुआ है. जांच में पूरी सच्चाई सामने आएगी. 


16 जिला में से इस घोटाले को लेकर पहला मामला पूर्व बर्दवान जिला से 

 बुदबुद थाने में दर्ज हुई. 142 संस्थानों की सूची में पूर्व बर्दवान जिला में स्थित कैमेलिया इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी का नाम भी शामिल है. यहां के 56 विद्यार्थियों (लाभार्थियों) को स्कॉलरशिप का फंड मिला है, जो फर्जी तरीके हासिल किया गया है. जिला प्रशासन की ओर से जांच के क्रम में पाया गया कि कैमेलिया इंस्टिट्यूट के नाम का उपयोग कर विद्यार्थी स्कॉलरशिप हासिल की. यह 56 लाभार्थी कैमेलिया इंस्टिट्यूट के हैं ही नहीं. जिला प्रशासन के निर्देश पर कैमेलिया इंस्टिट्यूट की ओर से बुदबुद थाने में 11 नवम्बर 2025 को शिकायत हुई, जिसके आधार 56 लाभार्थियों को नामजद आरोपी बनाकर कांड संख्या 170/25 में बीएनएस की धारा 316(2)/318(4)/319(2)/336(3)/338/340(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई. 56 लाभार्थियों का पता असम राज्य के विभिन्न इलाकों में है. पुलिस मामले की जांच शुरू की है. यह स्कॉलरशिप की राशि लाभार्थी को संस्थान की मंजूरी के बगैर नहीं मिल सकता है और प्रक्रिया सारी ऑनलाइन है. पुलिस यह जांचने में जुटी है कि कैमेलिया इंस्टिट्यूट की मंजूरी के बगैर लाभार्थियों को यह राशि कैसे मिल गयी? 



दोषी पाए जाने वाले संस्थानों का लाइसेंस रद्द करने का दिया निर्देश 

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी के राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मुख्य सचिव को भेजे गये पत्र में लिखा कि अल्पसंख्यक छात्रवृति लाभार्थियों की वास्तविकता जानने के लिए राज्य के अधिकारियों द्वारा संस्थानों का भौतिक निरीक्षण करवाएं, निधि का दुरुपयोग पाये जाने पर चूककर्ताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करें और ऐसे संस्थानों का यूडीआइएसइ/एआइएसएचइ कोड निलंबित करें. इस मामले में सरकारी कर्मचारी की संलिप्त पाये जाने पर उसे निलंबित निलंबित करने सहित अन्य कार्रवाई भी कर सकते हैं. राज्य पुलिस के साइबर सेल की भी सहायता ली जा सकती है.

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