कांचरापाड़ा (पीबी टीवी): गरीबी और घोर अभाव ने एक बार फिर ममता और इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। पश्चिम बंगाल के कांचरापाड़ा नगरपालिका के वार्ड नंबर 1 की फोरमैन कॉलोनी में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक दंपति अपने महज 6 दिन के नवजात पुत्र को बेचने की फिराक में था। हालांकि, सतर्क पड़ोसियों की सजगता के चलते उन्हें रंगेहाथ पकड़ लिया गया।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, निताई राय, जो पेशे से एक वैन चालक है, के घर पर बुधवार को तीन संदिग्ध महिलाएं आई थीं। इन महिलाओं ने निताई की पत्नी से कुछ देर तक बातचीत की और फिर वहाँ से चली गईं। इसके कुछ ही देर बाद, निताई की पत्नी अपने 6 दिन के नवजात शिशु को लेकर घर से बाहर निकली।
पड़ोसियों को इस बात पर तुरंत शक हुआ, क्योंकि उन्होंने कुछ देर पहले घर में उन संदिग्ध महिलाओं को देखा था। शक के आधार पर इलाके के लोगों ने चुपके से दंपति का पीछा करना शुरू कर दिया और साथ ही पूरे मामले की सूचना बिजपुर थाना पुलिस को भी दे दी।
पड़ोसियों का गंभीर आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह दंपति पहले भी एक बार इसी तरह अपने एक बच्चे को बेच चुका है। लोगों का कहना है कि उस बिक्री से मिले पैसों से दंपति ने एक टो-टो (ई-रिक्शा) खरीदा था और उन्हें 20 हजार रुपये नकद भी मिले थे। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस बार भी पैसों के लालच में उन्होंने वही घिनौना काम दोहराने की कोशिश की है।
पहले इनकार, फिर कबूलनामा
शुरुआत में, आरोपी निताई राय ने दावा किया कि वह बच्चे को बेचने नहीं, बल्कि डॉक्टर को दिखाने के लिए ले जा रहा था। लेकिन, जब स्थानीय लोगों ने उसे घेरकर कड़ाई से दबाव बनाया, तो उसने आखिरकार स्वीकार कर लिया कि वह बच्चे को बेचने के लिए ले जा रहा था।
हालांकि, अपने पहले बच्चे की बिक्री के संबंध में उसने दावा किया कि "पहले बच्चे को पैसे लेकर नहीं, यूं ही दे दिया था।" पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है और दंपति से पूछताछ की जा रही है। यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और गरीबी की भयावहता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

0 टिप्पणियाँ