पांशकुड़ा, पूर्व मेदिनीपुर (न्यूज एशिया): 2019 से जारी SSC (कर्मचारी चयन आयोग) आंदोलन की प्रमुख आवाज़, रासमणि पात्रा ने आज पांशकुड़ा गर्ल्स हाई स्कूल में आयोजित SSC की दूसरे चरण की परीक्षा में हिस्सा लिया। रासमणि पात्रा, जो 1000 दिन के विरोध के बाद सिर मुंडवाकर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए जानी जाती हैं, परीक्षा देने के बावजूद उनके चेहरे पर संतोष की जगह गहरा गुस्सा और असंतोष दिखाई दिया।
पात्रा ने इस परीक्षा को अपने और दूसरे योग्य उम्मीदवारों के साथ हुआ "अन्याय और अपमान" बताया।
क्या कहा रासमणि पात्रा ने?
रासमणि पात्रा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "हम इस परीक्षा को अपना अपमान मानते हैं। हमारे साथ धोखा किया गया है। सरकार ने बार-बार परीक्षा और नियुक्ति की समय-सीमा दी, लेकिन कभी अपना वादा पूरा नहीं किया। आज हमें फिर से परीक्षा के नाम पर घसीटा जा रहा है।"
उन्होंने आगे कहा कि आयोग और सरकार, दोनों पर अब कोई भरोसा नहीं रहा। पात्रा के मुताबिक, योग्य उम्मीदवारों को भी फिर से परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो कि बिल्कुल गलत है।
आंदोलन का एक जाना-पहचाना चेहरा
रासमणि पात्रा 2019 से SSC आंदोलन में सक्रिय रही हैं। 1000 दिनों के विरोध के बाद उन्होंने सिर मुंडवाकर अपना रोष प्रकट किया था। इतने लंबे संघर्ष और योग्य होने के बावजूद, उन्हें अभी तक नौकरी नहीं मिली है।
आज जब राज्यभर में SSC की दूसरे चरण की परीक्षा हो रही है, पुराने योग्य उम्मीदवारों को फिर से परीक्षा देने के लिए मजबूर किया गया है, जिससे उनकी नाराजगी और भी बढ़ गई है। रासमणि पात्रा जैसे आंदोलनकारी चेहरों का परीक्षा में शामिल होना, राज्य सरकार और SSC आयोग की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाता है।
यह स्पष्ट है कि भले ही परीक्षा शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित की जाए, लेकिन योग्य उम्मीदवारों के साथ कई सालों से चले आ रहे अन्याय के खिलाफ उनकी लड़ाई को आसानी से दबाया नहीं जा सकता।

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