रानीगंज: रानीगंज आदिवासी समन्वय समिति ने एक जघन्य अपराध के मामले में न्याय की गुहार लगाते हुए पश्चिम बंगाल सरकार के गृह मंत्री को पत्र भेजा है. यह पत्र रानीगंज थाना अंतर्गत पंजाबी मोड़ चौकी के माध्यम से भेजा गया. समिति ने बीरभूम जिले के रामपुरहाट थाना अंतर्गत बारहमेसिया गांव में एक नाबालिग आदिवासी लड़की के साथ हुए बलात्कार, हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है.
अपने पत्र में समिति ने गृह मंत्री को बताया कि बीरभूम जिले के श्याम पहाड़ी रामकृष्ण विद्यापीठ के शिक्षक मनोज पाल ने 13 साल की बच्ची को पहले अपने घर में कैद रखा और कई दिनों तक उसके साथ बलात्कार किया. बाद में उसने लड़की की हत्या कर दी और उसके शरीर को टुकड़े-टुकड़े कर एक बोरे में भर दिया, जिसे मौका पाकर उसने पानी में फेंक दिया. लड़की के परिवार ने 28 अगस्त को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. आरोपी ने आखिरकार इस जघन्य घटना को अंजाम देने की बात स्वीकार कर ली है.
समिति ने कहा कि इस घटना के अलावा भी पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में हत्या और बलात्कार की घटनाएं घट रही हैं. इसलिए उन्होंने गृह मंत्री से आवेदन किया है कि आरोपी मनोज पाल को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और उसे फांसी पर लटकाया जाए.
संगठन के आह्वानकर्ता विजय मुर्मू ने इस मामले की गंभीरता पर बात करते हुए कहा कि जिस तरह से एक शिक्षक ने अपनी नाबालिग छात्रा के साथ दुराचार किया और फिर उसकी हत्या कर शरीर के टुकड़े कर दिए, वह समाज को हिलाकर रख देने वाली घटना है. उन्होंने कहा, "शिक्षक समाज का निर्माता होता है। अगर वही इस तरह की घटना करेगा तो समाज का क्या होगा?"
संगठन ने रानीगंज के पंजाबी मोड़ चौकी प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर यह मांग की है कि प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि आरोपी शिक्षक को फांसी की सजा दी जाए. इसके साथ ही उन्होंने भारत के सभी समाज के लोगों, खासकर महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा की भी मांग की है.










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