बांकुडा- निम्न दबाव के कारण हुई बारिश में गंगाजलघाटी के बरबेंदा गांव में छह मिट्टी के घर ढह गए। सिर छुपाने की जगह खो चुके इन गरीब परिवारों के असहाय सदस्य अस्थायी रूप से गांव के प्राथमिक विद्यालय में रह रहे हैं। दिन-भर मजदूरी कर गुजर-बसर करने वाले इन परिवारों को अब तक सरकारी आवास योजना के तहत घर नहीं मिला। सुरक्षित और स्थायी ठिकाना कब मिलेगा, यह सवाल अब भी उनके लिए अनुत्तरित है।
इसी घटना को केंद्र में रखकर राजनीतिक तकरार भी शुरू हो गई है। स्थानीय बीजेपी नेताओं का आरोप है कि राज्य सरकार ने केंद्र की परियोजना के पैसों का हिसाब नहीं दिया, इसलिए यह हालात बने। उनका कहना है कि तृणमूल नेताओं की संपत्ति तो बढ़ी है, लेकिन आम गरीब लोगों का कोई विकास नहीं हुआ। यहां तक कि उन्होंने ‘तृणमूल कांग्रेस का ‘चोर’ बताया।
वहीं, तृणमूल संचालित गंगाजलघाटी पंचायत समिति के अध्यक्ष ताराशंकर मंडल ने केंद्र की अवहेलना का मुद्दा उठाया। हालांकि उनका कहना है कि केंद्र सरकार पैसा न देने के बावजूद राज्य सरकार ने अपनी ओर से आवास योजना शुरू की है। दूसरे चरण में इन सभी परिवारों को घर मिलेगा, ऐसा उनका दावा है।

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