बांकुडा: बांकुडा सम्मिलानी कॉलेज, जिसे हाल ही में एनएएसी द्वारा बी++ ग्रेड प्राप्त हुआ है, के आईक्यूएसी, जूलॉजी विभाग, इको क्लब और एनएसएस ने पश्चिम बंगाल सरकार के स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से "लिम्फेटिक फाइलेरियासिस और पारंपरिक चिकित्सा उपभोग कार्यक्रम" पर एक दिवसीय स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह कार्यक्रम अप्रैल, 2025 को कॉलेज परिसर में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य लिम्फेटिक फाइलेरियासिस के बारे में जागरूकता बढ़ाना और इसके रोकथाम व उपचार के महत्व पर जोर देना था।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सामने एक रचनात्मक पोस्टर ड्राइंग प्रतियोगिता के साथ हुई। इस प्रतियोगिता में कॉलेज के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने कलात्मक कौशल का प्रदर्शन करते हुए फाइलेरिया रोग से संबंधित महत्वपूर्ण संदेशों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया।
मुख्य जागरूकता बैठक दोपहर 12 बजे कॉलेज के रामानंद सभागार में आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण सत्र में स्वास्थ्य विभाग के कई प्रतिष्ठित अधिकारियों ने भाग लिया और अपने विचार व्यक्त किए। जिला वीबीडी कंसल्टेंट श्री बसंत कुमार बेहरा, पीसीआई की जिला समन्वयक ममता सेनगुप्ता, जिला कीट विज्ञानी प्रीतम भट्टाचार्य, सूडा के कीट विज्ञानी सुमित नाथ, सीडीओ कृष्णा चियाना, पीएचएन मौसमी रॉय, और वरिष्ठ पीएचएन संगीता दत्ता ने फाइलेरिया के कारणों, लक्षणों, रोकथाम और उपचार के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पारंपरिक चिकित्सा के महत्व और इसके उपभोग की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। इस ज्ञानवर्धक चर्चा से उपस्थित छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और स्थानीय आम जनता को काफी लाभ हुआ और उन्हें इस रोग की रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा मिली।
जागरूकता बैठक के पश्चात, दोपहर 12:00 बजे से 2:00 बजे तक प्राणि विज्ञान विभाग में एक सार्वजनिक औषधि सेवन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस शिविर में प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की देखरेख में आए हुए सभी लोगों को लिम्फेटिक फाइलेरियासिस से बचाव के लिए मुफ्त दवा खिलाई गई। इस पहल को सफल बनाने में एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी एवं महाविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद मंडल, इको क्लब संयोजक और जूलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर, और कॉलेज के गणित विभाग के प्रभारी शिक्षक एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. स्वप्न मुखर्जी ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।
आम जनता के बीच स्वास्थ्य जागरूकता और निवारक उपायों को बढ़ावा देने के इस महत्वपूर्ण प्रयास को छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय निवासियों से व्यापक सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। यह कार्यक्रम भविष्य में इस तरह की जन-जागरूकता पहलों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है।


0 टिप्पणियाँ