रानीगंज- हर साल की भांति इस वर्ष भी रानीगंज में बांग्ला नव वर्ष का पर्व बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया. इस अवसर पर रानीगंज शरण्या और रानीगंज शहर तृणमूल कांग्रेस की ओर से विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के गणमान्य नागरिकों और बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया.
रानीगंज शरण्या की तरफ से बांग्ला नव वर्ष के उपलक्ष्य में एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई. यह शोभायात्रा रानीगंज षष्ठी गोरिया पब्लिक लाइब्रेरी से सुबह शुरू हुई और नेताजी मूर्ति, बड़ा बाजार होते हुए वापस पब्लिक लाइब्रेरी पर संपन्न हुई.इस शोभायात्रा में रानीगंज शरण्या की अध्यक्ष श्रीमती जुथिका बनर्जी, रानीगंज टाउन टीएमसी अध्यक्ष श्री रूपेश यादव, बोरो चेयरमैन श्री मुजम्मिल शहजादा के अलावा रानीगंज के कई प्रतिष्ठित व्यक्ति उपस्थित थे. इस मौके पर जुथिका बनर्जी ने सभी को बांग्ला नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और ईश्वर से प्रार्थना की कि आने वाला नया साल सभी के लिए मंगलमय हो. उन्होंने कहा कि बांग्ला नव वर्ष सभी के जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आए, यही उनकी और उनके संगठन की कामना है और नए साल में सभी की मनोकामनाएं पूरी हों.
वहीं, बांग्ला नव वर्ष के अवसर पर रानीगंज शहर तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी संगठन के अध्यक्ष रूपेश यादव के नेतृत्व में एक प्रभात फेरी निकाली गई.इस प्रभात फेरी में रानीगंज शहर टीएमसी के तमाम नेता और कार्यकर्ता उत्साहपूर्वक शामिल हुए. इस अवसर पर बोरो चेयरमैन मुजम्मिल शहजादा ने सभी को बांग्ला नव वर्ष की बधाई दी और कहा कि रानीगंज एक भाईचारे का शहर है, जहां सभी लोग मिलजुल कर रहते हैं और एक दूसरे के उत्सवों में शामिल होते हैं. उन्होंने विशेष रूप से रानीगंज शरण्या द्वारा आयोजित शोभायात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें रानीगंज के सभी धर्मों और जातियों के लोगों ने एकजुट होकर भाग लिया और एक दूसरे को नए साल की शुभकामनाएं दीं.
रूपेश यादव ने भी बांग्ला नव वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी हमेशा कहती हैं कि धर्म सबका अलग-अलग हो सकता है, लेकिन उत्सव सबका साझा है. इसी आदर्श को ध्यान में रखते हुए आज रानीगंज शरण्या द्वारा आयोजित शोभायात्रा में सभी धर्म और जातियों के लोग सम्मिलित हुए हैं, जो रानीगंज की असली पहचान है.
इस प्रकार, रानीगंज में बांग्ला नव वर्ष का आगमन बड़े ही सौहार्दपूर्ण और उत्साहजनक माहौल में हुआ, जिसमें सभी समुदायों के लोगों ने मिलकर इस पारंपरिक पर्व को मनाया.



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