जामुड़िया- डीवाईएफआई जामुड़िया पश्चिम अंचल कमेटी ने जामुड़िया बाजार स्थित सिद्धू-कान्हू मूर्ति के समीप शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के 94वें शहादत दिवस पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया. सभा में शहीदों की तस्वीरों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई.
सभा को संबोधित करते हुए, डीवाईएफआई पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी के सदस्य बुद्धदेव रजक ने कहा कि भगत सिंह पूर्ण स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय के लिए क्रांति के मार्ग पर चलने के पक्षधर थे. उनका मानना था कि देश को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराने के लिए हिंसा का मार्ग ही उचित है.
जिला कमेटी के सदस्य विकास यादव ने कहा कि भगत सिंह ने युवाओं को देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने अपने विचारों को युवाओं तक पहुंचाने के लिए साहित्य और भाषणों का प्रयोग किया.भगत सिंह का नारा "इंकलाब जिंदाबाद" स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बहुत प्रसिद्ध हुआ और यह नारा आज भी स्वतंत्रता और क्रांति का प्रतीक है.
युवा नेता सौरभ बनर्जी ने कहा कि भगत सिंह आजीवन नास्तिक थे. वे एक धर्मनिरपेक्ष समाजवादी राष्ट्र के प्रबल समर्थक थे. उन्होंने कहा कि भगत सिंह का मानना था कि देश की आजादी के लिए प्राणों का बलिदान देना आवश्यक है, इसलिए उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत की अधीनता को स्वीकार न कर फांसी के फंदे पर झूलना स्वीकार किया था.
सभा में प्रदीप बाउरी, परिचय बाउरी, शंकर रवानी, नूरी खातून, एमडी शमशेर, अतनु बाउरी और रचना दास सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.
दूसरी और शहीद-ए-आजम भगत सिंह का शहीदी दिवस पर पंजाबी मोड़ स्थित शहीद भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया.
इस अवसर पर पंजाबी मोड़ गुरुद्वारा कमिटी की और से स्थानीय पार्षद ज्योति सिंह ने कहा कि "आज शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का शहीद दिवस है. इसी दिन, ब्रिटिश शासकों ने उन्हें फाँसी पर लटका दिया था. भले ही भगत सिंह को फाँसी दे दी गई, लेकिन उनके आदर्श और समाज और युवाओं के विकास के प्रति उनका संदेश आज भी जीवित है. वह संदेश, वह जज्बा अमर है. मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि आज इस कार्यक्रम में शामिल होकर भगत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा हूं." उन्होंने युवा पीढ़ी से भगत सिंह के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आग्रह किया.
इस अवसर पर इंदर सिंह,माधो सिंह,राजपाल सिंह,सुरेंद्र सिंह,राजपाल सिंह आदि ने भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यादान कर श्रद्धाजंलि अर्पित किया गया.











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