बांकुड़ा-छतना के जनार्दनपुर माटिर सृष्टि परियोजना में हाल ही में अमेज़ॅन जंगल का एक दुर्लभ मांसाहारी पौधा, सूर्य शिशिर, पाया गया है। यह छोटा, लाल-गुलाबी पौधा आमतौर पर अमेज़ॅन के उष्णकटिबंधीय जंगलों में पाया जाता है। इसकी चिपचिपी सतह कीड़ों को फंसाकर उन्हें पचा लेती है।
विधानचंद्र कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का मानना है कि इस क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी की संरचना अमेज़ॅन के समान होने के कारण यह पौधा यहां पनप रहा है। विशेष रूप से बांग्ला कैलेंडर के भादो महीने में इस पौधे का उगना इस बात का प्रमाण है।
क्यों है खास यह पौधा?
अनोखी प्रजाति: यह पौधा अपनी मांसाहारी प्रकृति के कारण दुनिया भर में जाना जाता है।
पर्यावरण संकेतक: इस पौधे का मिलना इस बात का संकेत है कि यहां की पारिस्थितिकी तंत्र काफी समृद्ध है।
वैज्ञानिक अध्ययन: वैज्ञानिक इस पौधे का अध्ययन कर इसके बारे में और अधिक जानने की कोशिश कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों में उत्सुकता
इस दुर्लभ पौधे के मिलने से स्थानीय लोगों में काफी उत्सुकता है। परियोजना के संपादक शंकर चक्रवर्ती ने इस जगह को संरक्षित करने का निर्णय लिया है ताकि लोग इस अनोखे पौधे को देख सकें।
विशेषज्ञों का कहना
विधानचंद्र कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बताया कि जिन क्षेत्रों में मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी होती है, वहां ऐसे मांसाहारी पौधे पाए जाते हैं। यह पौधा कीड़ों को पचाकर आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त करता है।

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