रानीगंज - शहर के मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी अस्पताल में एक 3 वर्षीय बालक माहिरी जैसवारा का समय पर चिकित्सक द्वारा इलाज नहीं मिलने से बच्चे का दम तोड़ने का आरोप बालक के परिजनों ने बीते रविवार को लगाया था . बच्चे के पिता अरुण जैसवारा ने अस्पताल प्रबंधन तथा कार्यरत डॉक्टर पियाली दासगुप्ता को इलाज करने के लिए बुलाने ,मगर बच्चे के बिगड़ते हालत के बीच एक घंटे तक डॉक्टर नहीं आने का आरोप लगाते हुए कहा था कि अगर समय पर उसके बच्चे का इलाज हो जाता तो संभवत उसका पुत्र बच जाता.
इस आरोप को सरासर गलत बताते हुए शिशु रोग चिकित्सक पियाली दास गुप्ता ने कहा कि रविवार होने के कारण वह भी छुट्टी पर थी,परन्तु जब अस्पताल से जब बच्चे की हालात खराब होने की खबर मोबाइल पर दिए जाने के बाद मानवता के नाते वह बालक उसके अधीन रोगी न होने के बावजूद भी एक घण्टे के भीतर उसका चेकअप करने के लिए उसे अपने घर बुलाई, पर वह मेरे घर पहुंचा ही नही,बाद में मुझे जानकारी मिली कि उसकी अवस्था अत्यंत खराब थी,एवं उसके अभिभवक के मारवाड़ी अस्पताल आने के पहले वह कई चिकित्सक के पास इलाज के लिए गये थे,पर कोई चिकित्सक उन्हें रविवार होने के कारण नहीं मिला.सच तो यह है कि जब मैंने उसे देखा ही नहीं तो मेरे ऊपर लापरवाही का आरोप आखिर किस प्रकार लगनी चाहिए,जबकि जिस वक्त मुझे फोन करके बुलाया गया उस वक्त मैं अपने पुत्र को ट्रेन में चढ़ाने के लिए स्टेशन गयी थी,मैने कहा भी लगभग एक घण्टा लगेगी.पियाली दास गुप्ता ने कहा की मैं बीते 24 वर्षो से प्रैक्टिस कर रही हूँ, एवं मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी अस्पताल में सेवा दे रही हूँ, एवं सभी जानते हैं कि मारवाड़ी अस्पताल जहां सिर्फ गरीबो का इलाज होता है,एवं जरूरतमंदों की सेवा की जाती है,इसके वावजूद भी इस अस्पताल पर तथा मुझ पर लापरवाही का आरोप लगाना सरासर गलत है. अगर इसी तरह इस प्रकार के आरोप लगते रहे तो वह दिन दूर नही जब जरूरत के समय लोगो को इलाज नहीं मिलेगी.चिकित्सक इलाज करने से कतराने लगेंगे.










0 टिप्पणियाँ