रानीगंज-वरिष्ठ सीटु नेता विवेक चौधरी का 31 अक्टूबर 2023 रात 8:30 बजे कोयला श्रमिक भवन,रानीगंज में 73 साल की उम्र में देहांत हो गया.विवेक चौधरी का जन्म वर्तमान के बांग्लादेश के मनमय सिंह नामक स्थान पर 1951 में हुआ था.मात्र 19 दिन की आयु में ही उनके पिता का देहांत हो गया था. उनका पालन पोषण उनकी माता ने किया. कुल चार बहन तीन भाई का पूरा परिवार वर्धमान शहर में स्थाई रूप से रहते है.पूरे परिवार का भरण पोषण उनकी माता करती थी जो नर्स का काम करती थी. 1983 में कामरेड विवेक चौधरी रानीगंज आए और पार्टी एवं ट्रेड यूनियन से जुड़े तब से आजीवन वह रानीगंज के ही होकर रह गए. उन्होंने हमेशा मजदूरों के हक के लिए संघर्ष किया. उन्होंने पूरे जिले ही नहीं बल्कि राज्य में एक जनप्रिय नेता के रूप से अपनी पहचान बनाई . विवेक होम चौधरी संगठन के अविभाजित वर्धमान जिला के सचिव मंडल के सदस्य, पश्चिम बर्धमान सीपीएम जिला कमेटी के सचिव मंडल के पूर्व सदस्य, वामपंथी श्रमिक संगठन सीटु के पूर्व महासचिव तथा सीटू के पश्चिम बर्दवान जिले के पूर्व अध्यक्ष थे. उनके निधन पर आसनसोल के पूर्व सांसद वंश गोपाल चौधरी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह एक वरिष्ठ वामपंथी नेता थे. जिन्होंने आजीवन श्रमिकों की भलाई के लिए संघर्ष किया. वह मुख्यतः वर्दमान जिले से संबंध रखते थे ,वह वर्धमान के एक स्कूल के छात्र थे ,उसके बाद कामरेड विकास चौधरी, मदन घोष और निरुपम सेन के नेतृत्व में वह छात्र आंदोलन से जुड़े .वामपंथी श्रमिक नेता रॉबिन सेन की सलाह पर वह रानीगंज में श्रमिक आंदोलन से जुड़े और हाराधन राय ,विकास चौधरी और लखन बाउरी के साथ यहां पर उन्होंने श्रमिक आंदोलन को मजबूत किया .उन्होंने कहा कि विवेक होम चौधरी पिछले कुछ समय से काफी बीमार चल रहे थे, उनको न्यूरोलॉजिकल समस्या हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने संगठन का काम करना नहीं छोड़ा. चेन्नई में संगठन की जो सभा हुई थी उसमें भी उन्होंने शिरकत की थी ,लेकिन इसके बाद उन्होंने नई पीढ़ी को आगे लाने के लिए अपनी जिम्मेदारी नहीं पीढ़ी को सौंप दी .उन्होंने कहा कि विवेक हम चौधरी के निधन से श्रमिक आंदोलन को इस क्षेत्र में करारा झटका लगा है . वहीं वामपंथी नेता तथा पांडेश्वर के पूर्व विधायक गौरांग चटर्जी ने कहा कि 60 के दशक में जब वामपंथी कार्यकर्ताओं को चुप-चुप कर काम करना पड़ता था और उनपर हमले होते थे, तब वह वामपंथी कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क रखते थे और रात के अंधेरे में उनके हाथ मजबूत करते थे .उन्होंने कहा कि इतने बड़े नेता होने के बावजूद उन्होंने हमेशा सादगी भरा जीवन जिया और यही उनकी सबसे बड़ी खासियत थी.माकपा।के पूर्व जिला सचिव सह माकपा के केंद्रीय कमिटी के सदस्य अमल हलदर ने कहा विवेक चौधरी ने बर्धमान जिले में वामपंथी संग़ठन को मजबूत किया.अपने हाथों से पोस्टरिंग किया,दीवाल लेखन किया, रोबिन सेन ,निरुपम सेन जैसे नेताओं से जुड़ कर श्रमिको के लिए आंदोलन किया,बर्न्स स्टैण्डर्ड,ईसीएल सह अंचल के तमाम संस्थाओ के श्रमिक हित के लिए सदैव डटे रहे,जनता के साथ उनका माधुर्य सम्पर्क था,छोटी छोटी बातों को महत्वपूर्ण तरीके से काम कर उसे अंजाम तक पहुंचाने की अद्भुत कला थी उनमें. वामपंथी कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क रखते थ, इतने बड़े नेता होने के बावजूद उन्होंने हमेशा सादगी भरा जीवन जिया और यही उनकी सबसे बड़ी खासियत थी,उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता है.
उनके पार्थिव शरीर पर श्रमिक नेता रुनु दत्ता,अनूप मित्रा,देवीदास बनर्जी,पंकज रॉय सरकार सहित अन्य ने माल्यदान कर लाल सलामी दिया.उनके पार्थिव देह को कोयला श्रमिक भवन से गिरजा पाड़ा माकपा कार्यालय,त्तपश्चात् बल्लभपुर पार्टी कार्यालय के बाद मेजिया श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया.












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