रानीगंज-रविवार को रानीगंज के त्रिवेणी देवी भालोटिया कॉलेज में निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन संपन्न हुआ. इस दिन रानीगंज शाखा का 35वां वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें बर्दवान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मलय रक्षित मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित हुए. कार्यक्रम में उन्होंने बांग्ला भाषा और साहित्य के भविष्य के बारे में अपने विचार व्यक्त किए.मुख्य वक्ता ने कहा कि बांग्ला भाषा एक अमर एवं अक्षय भाषा है. यह भाषा सभी समस्याओं से सर्वदा मुक्त है.यह भाषा समृद्ध होने के साथ-साथ सभी भाषाओं को गरिमा प्रदान करती है. यह बांग्ला भाषा एवं साहित्य वर्तमान भाषा से भिन्न है,दैनिक उपयोग की सभी क्षेत्रों की भाषाओं से, बंगाली भाषा और साहित्य हर दिन समृद्ध होती है. वर्तमान समय में बांग्ला भाषा एक ऐसी भाषा है और बांग्ला साहित्य का विस्तार इतना दूरगामी है कि बांग्ला भाषा हर भाषा को समान दर्जा देकर सभी भाषाओं को अपनी भाषा मानती है. इसी प्रकार मुख्य वक्ता के साथ-साथ इस सम्मेलन में उपस्थित अन्य सभी वक्ताओं ने भी अपने भाषण में यह दावा किया कि बांग्ला साहित्य का समृद्ध पथ सदैव के लिए मिट नहीं सकेगा. इस कार्यक्रम में रानीगंज शाखा की वरिष्ठ सदस्य एवं लेखक गुनामोय फौजदार, उर्दू महिला कवयित्री एवं प्रोफेसर डॉ. साबरा खातून एवं कवि एवं लेखक पार्थप्रतिम आचार्य को विशेष रूप से सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में अथितियों ने बांग्ला भाषा और साहित्य के भविष्य पर विस्तृत चर्चा के साथ-साथ इस भाषा को और अधिक कैसे फैलाया जा सकता है, इस पर भी प्रकाश डाला. इस सम्मेलन पर आधारित सम्मेलन स्थल पर एक बुक स्टॉल खोला गया. इस कार्यक्रम में प्रो डॉ मृणाल बनर्जी, शाखा प्रमुख मनोरंजन माजी, प्रो मनोज चक्रवर्ती आदि ने विशेष रूप से उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाई.


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