क्रांतिकारी पुरोहित पं.आर्यगिरि का नया धमाका "आर्य पंचांग"
जामुड़िया - जामुड़िया बोरो एक अन्तर्गत वार्ड संख्या दस स्थित निंघा के सुख्यात निंगेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी एवं समाज चिंतक साहित्यकार पंडित आर्य प्रहलाद गिरि ने परंपरागत-पंचांगकारों- ज्योतिषियों की हठधर्मिता-रूढ़ीवादिता को तोड़ते हुए, नये तरीके से मात्र दो पृष्ठों कैलेंडर नुमा एक ऐसा सरल-संक्षिप्त पंचांग का आविष्कार करने का दावा किया है, जिसमें न तो अब कोई भी पर्व दो-दो दिनों में बंटेंगे और न इस पंचांग को अब हर साल बदलना ही पड़ेगा।
इस "आर्य-पंचांग" में हर साल अंग्रेजी महीनों के निश्चित दिनांकों के निश्चित बजे ही सूर्योदय-सूर्यास्त, 6 ऋतुओं, सौर मासों के बारहो संक्रांतियों, 27 नक्षत्रों के सचित्र परिचयों के साथसाथ सभी मुख्य पर्वों व संतों-महापुरुषों के निश्चित- जयंतियों को भी बड़े निर्णायक सूझबूझ से दर्शाया गया है।
धर्म के नाम पर अवैदिक-कुधार्मिक पाखंडों का सदा ही विरोध करते रहनेवाले पं. आर्यगिरि ने इस पंचांग में भी बताया है कि राशिफल, ग्रहफलादि भाग्य-भविष्य बताते रहनेवाले आजकल के लगभग सभी बाजारू पंचांगों में 90% झूठ पाखंड अंधविश्वास ही भरे होते हैं, जिनकी धूर्तता से जन साधारण लोग पुरुषार्थी बनने के बजाय भाग्यवादी-अंधविश्वासी मूर्ख ही होते जा रहे हैं। इसी से हमारी वैदिक मानव-सभ्यता की वैज्ञानिक-प्रगति भी बाधित होती जा रही है धर्म-समाज की पतनोन्मुखी ऐसी दुरावस्था में इस स्थायी "आर्य-पंचांग" को अत्यंत आवश्यक एवं सर्वोपयोगी बताते हुए भी पं.आर्यगिरि ने अपनी अल्पज्ञता स्वीकारते हुए गणितज्ञ रामानुजन जैसे विज्ञ-पाठकों से सनम्र-आह्वान भी किया है कि वे इसे और भी अधिक युगानुकूल उपयोगी बनाकर, देश-धर्मोत्थान में अपनी भी सेवायें दे सकते हैं! इसीलिये मैं इस आर्यपंचांग को अपना काॅपीराइट से भी मुक्त रख रहाहूं बातचीत के दौरान पं. आर्यगिरि ने लोकहितैषी इस स्थायी सौर पंचांग का लोकार्पण (विमोचन) भी इस बार किसी नेता,धर्माचार्य-ज्योतिषाचार्य से न कराकर, काशी में किसी धर्मज्ञ गणितज्ञ प्रोफेसर वैज्ञानिक या सैनिक साहित्यकार जैसे गौरवान्वित जनों से ही किसी विशेष अवसर पर कराने का विचार प्रकट किये।


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