जामुड़िया -ईसीएल पर पंचायत चुनाव से पहले किये गये बादे को तोड़ने का आरोप ग्रामीणों द्वारा लगाया है. यह घटना सोनपुर क्षेत्र में ईसीएल के मधुडांगा गांव पुनर्वास परियोजना से संबंधित है. जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र के चिचुरिया ग्राम पंचायत के डंगाल पाड़ा में पुनर्वास परियोजना के लिए ली गई भूमि को देखते हुए, परियोजना की शुरुआत के दौरान ग्रामीणों द्वारा किए गए आंदोलन के कारण ईसीएल वर्तमान में अपने वादों को पूरा नहीं कर रहा है. ग्राम वासी का आरोप है कि उन्होंने चिचुरिया डंगाल पाड़ा के निवासियों को धोखा दिया है. ईसीएल से जमीन वापस लेने के लिए सुबह से ही इलाके की महिलाएं और पुरुषों ने परियोजना का कार्य बंद कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया . उन्होंने कहा कि हमारे कइ सालों पुराने खेल के मैदान को बचाने के लिए हम आंदोलन में शामिल हुए.
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पुनर्वास परियोजना की शुरुआत से ही ग्रामीण इस क्षेत्र के सैकड़ों साल पुराने खेल के मैदान को बचाने के आंदोलन में शामिल हुए थे. लंबे आंदोलन के बाद, ईसीएल अधिकारियों ने आखिरकार उनके साथ बैठकर खेल का मैदान बनाने, बिजली की आपूर्ति करने और इलाके में एक मैरिज हॉल बनाने का वादा किया था. सारा काम ठीक चल रहा था लेकिन पिछले पंचायत चुनाव से पहले बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई और ग्रामीणों को बताया गया था कि चुनाव के बाद यह दोबारा शुरू होगा, लेकिन चुनाव परिणाम आने के एक माह बाद भी अब तक बिजली आपूर्ति का काम शुरू नहीं हो सका है. साथ ही उन्हें खेल के मैदान का दोबारा इस्तेमाल करने की इजाजत भी नही दी जाएगी .
इसके बाद आज सुबह से सभी ग्रामीणों ने एकजुट होकर परियोजना का काम बंद करा दिया और मैदान पर कब्जा करने के लिए प्रदर्शन किया. उन्होंने ईसीएल से बिजली आपूर्ति की भी मांग की.
इस विरोध प्रदर्शन को लेकर जब इलाके में तनाव पैदा हो गया तो जामुड़िया थाने की केंदा फांड़ि की पुलिस ने आकर स्थिति को संभाला . अंत में पुलिस के आश्वासन पर ग्रामीणों ने आज की तरह धरना तो खत्म कर लिया, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि भले ही पुलिस की बात रखने के लिए धरना खत्म कर दिया गया, लेकिन जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक इस प्रोजेक्ट का काम बंद रहेगा. अन्यथा ग्रामीण बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे.


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