जामुड़िया - इस पंचायत चुनाव में एक ही परिवार के तीन वामपंथी उम्मीदवार बने जुटे है,चुनावी मैदान में. जामुड़िया प्रखंड अन्तर्गत बहादुपुर ग्राम पंचायत क्षेत्र में वाम उम्मीदवार पंचायत समिति के 16 नम्बर सीट से चंद्रहंस बाउरी, उनकी बेटी अमृता बाउरी कृष्णानगर जबकि इकलौता बेटा तन्मय बाउरी बहादुपुर ग्राम पंचायत के भूत बांग्ला संसद से वाम मोर्चा द्वारा नामांकित सीपीआईएम उम्मीदवार हैं .चंद्रहस बाउरी ने बताया कि 2013 और 2018 के पंचायत चुनाव में वामपंथी समर्थकों को आतंक का शिकार होना पड़ा.वाम कार्यकर्ताओं-समर्थकों या उम्मीदवारों को मारपीट, घरों में लूटपाट, कार्य से निष्कासन, सामाजिक बहिष्कार समेत कई समस्याओं का सामना करना पड़ा था. इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने पार्टी से उनके बेटे और बेटी को पंचायत चुनाव में उतारने का अनुरोध किया, ताकि उनके समर्थकों को उस अनुभव से कोई खतरा न हो. तन्मय बाउरी ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में उनके कार्यकर्ता और समर्थक गरीब परिवार से हैं. वे मिट्टी के घरों में बहुत कठिनाई से रहते हैं,किसी प्रकार दैनिक मजदूरी कर परिवार चलाते हैं. लेकिन पिछले दिनों सत्ताधारी दल ने जिस तरह से उन्हें आतंकित किया, उससे इस गरीब वर्ग के उनके समर्थकों को ज्यादा नुकसान हुआ. उनके लिए उनके कार्यकर्ता समर्थक ही पार्टी की संपत्ति हैं. इसलिए वे उन संसाधनों की सुरक्षा के लिए स्वयं उम्मीदवार बनने के लिए सहमत हुए. तन्मय बाउरी ने कहा कि अगर वह विजयी होते है तो कम से कम उनके समर्थकों को तो आतंक से मुक्ति दिलाने का वह प्रयास करेंगे. हालांकि, इस पंचायत में अब तक उन्हें किसी तरह का आतंक या धमकी नहीं दी गयी है
दूसरी ओर इस विषय में जामुड़िया ब्लॉक नंबर दो के तृणमूल कांग्रेस नेता दिनेश चक्रवर्ती ने कहा कि आतंक की बात बेबुनियाद है .सीपीआईएम पार्टी परिवारवाद के खिलाफ अभियान चलाने की बात करते है. परन्तु यह बात गलत है, साबित कर दिया कि वे परिवार व्यवस्था में विश्वास रखते हैं. इसके अलावा लोग सीपीएम के 34 साल के कुशासन से भी नाराज हैं.सच तो यह है कि ममता बनर्जी की विकासात्मक परियोजनाओं को देख आम लोग सीपीआईएम पार्टी के उम्मीदवार ही नहीं बनना चाहते है, परिणामस्वरूप, उन्हें एक ही परिवार से उम्मीदवार देने को मजबूर होना पड़ता है .वहीं भाजपा नेता संतोष सिंह ने एक ही परिवार के तीन उम्मीदवारों का समर्थन करते हुए कहा कि जिस तरह से तृणमूल कांग्रेस आतंक मचा रही है, उससे आम लोग डरे हुए हैं, इसलिए, विपक्ष को एक ही परिवार से कई उम्मीदवारों को नामांकित करने के लिए मजबूर होना पड़ा है.यह कोई पारिवारिक मामला नहीं है.



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