रानीगंज- शुक्रवार की संध्या रानीगंज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय नर्सेज दिवस मनाई गई, इस स्वास्थ्य केंद्र में कार्य करने वाली 84 नसों को सम्मानित किया गया.ज्ञात हो कि कोरोना काल में इन स्वास्थ्य केंद्र में काम करने वाली नर्सों के प्रति उनकी सेवा और लगन देख कर लोगो के मन में उनके प्रति भावना में परिवर्तन आई है और उनके सेवा से लोग काफी प्रभावित भी हुए हैं.कोरोना महामारी के दरमियान अपने पूरे परिवार को छोड़कर जिस रूप से महामारी में अपने दायित्व का निर्वाह किया है वह भुलाया नहीं जा सकता है. यह बाते कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित जिला स्वास्थ्य अधिकारी डी पी एच एन ओ रिंकू चटर्जी ने कहीं उन्होंने नर्सेज दिवस को लेकर बताया कि मूल रूप से एक ब्रिटिश महिला, "नाइटिंगेल फ्लोरेंस" जो इटली में पैदा हुई थी, बाद में इंग्लैंड में एक नर्स के रूप में काम किया, एक बार 1854 में प्रेमियन युद्ध में घायल सैनिकों की सेवा के लिए अथक परिश्रम किया. उस समय, वह आधुनिक नर्सिंग के संस्थापक के रूप में प्रसिद्ध हुई, साथ ही नर्सिंग की परंपरा से हटकर, सेना के सैनिकों के लिए एक अच्छा वातावरण कैसे बनाया जाए, उनके जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि हो, मृत्यु दर कम हो, और इस तथ्य पर ध्यान केंद्रित कर अनगिनत सैनिक ठीक किया .फ्लोरेंस को "लेडी विद द लैंप" की उपाधि के साथ "नाइटिंगेल" की उपाधि दी गई थी नर्स के अद्वितीय प्रयासों और नर्सिंग के अग्रणी कार्य को ध्यान में रखते हुए उनके जन्मदिन को अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस के रूप में मनाया जाता है.इस अवसर पर स्वास्थ्य अधिकारी बी ओ एम एच अरशद अहमद ने सभी अतिथियों का अभिवादन किया और वर्तमान में राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली सेवाओं पर प्रकाश डालें. इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम की भी प्रस्तुति की गयी.

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