जामुड़िया : बोरो एक अन्तर्गत वार्ड संख्या दस स्थित निघा पंजाब नेशनल बैंक के ( सीएसपी ) कस्टमर सर्विस प्वाइंट नींघा ईसीएल कर्मी के पास से 10 लाख रुपये धोखाधड़ी का मामला प्रकाश में आया है. यह घटना नींघा के गिधोरिया पाड़ा के रहने वाला ईसीएल कर्मी गुरभजन पासवान के साथ हुई. वह सातग्राम एरिया क्षेत्र अंतर्गत जेके नगर कोलियरी में कार्यरत थे. गुरुभजन पासवान ने बताया कि मैं ईसीएल कर्मी हूँ एवं 30 अप्रैल को ईसीएल कंपनी से सेवानिवृत्ति हुआ हूं, ईसीएल में कार्य करते हुए 15 वर्ष पहले मैंने राजाराम केवट जो नॉर्थ बुक कोलियरी का रहने वाला है. उससे मैंने 2 लाख 80 हजार रुपए उधार में लिए थे मेरी महीने की पगार किसी महीने 40 हजार तो किसी महीने 50 हजार होती थी, राजाराम केवट मेरे हर महीने की पगार उठाता था क्योंकि उसके पास मेरा एटीएम पासबुक और चेक बुक रखा हुआ था. राजाराम केवट महीने के पूरी पगार उठाकर मुझे किसी महीने 10 हजार और किसी महीने 15 हजार रूपये देता था, बाकी पैसे राजाराम केवट रख लेता था .यह सिलसिला पन्द्रह सालों से चल रहा था .जब मैं 30 अप्रैल को ईसीएल कंपनी से सेवानिवृत्ति हुआ तो राजाराम केवट और उदय सिन्हा मुझे अपने साथ ले जाकर कल्ला के पंजाब नेशनल बैंक ब्रांच में मेरा नया खाता खुलवाया
. विगत दो दिनों पहले राजाराम केवट और उदय सिन्हा मुझे अपने साथ लेकर पंजाब नेशनल बैंक कल्ला में गए और चेक बुक में मुझसे हस्ताक्षर कराए गए और मुझे बताया गया कि दस लाख रुपए निकालें गए हैं और उस पूरी राशि से मुझे मात्र 2 लाख 30 हजार ही दिए गए बाकी के बचे पैसे राजाराम केवट और उदय सिन्हा ने ले लिए. मैंने घर आकर अपने बेटे को पूरी घटना की जानकारी दी. उसी समय मेरा बेटा मुझे लेकर श्रीपुर फाड़ी में गया . श्रीपुर फाड़ी के प्रभारी शेख रियाजउद्दीन ने पूरी घटना की जानकारी मुझसे ली और तुरंत कार्रवाई करते हुए राजाराम केवट और उदय सिन्हा को श्रीपुर फाड़ी में बुलाया . उन दोनों ने कबूला कि वह पैसा उन्होंने लिया है एवं वापस देने के लिए राजी हो गए . श्रीपुर फाड़ी के प्रभारी ने तुरंत इन पर मुकदमा दायर किया एवं जामुड़िया थाने में भेज दिया . जामुड़िया थाना की पुलिस ने दोनों को बुधवार की सुबह आसनसोल के जिला अदालत में भेज दिया जहां अदालत ने दोनों को चार दिनों की हिरासत में श्रीपुर फाड़ी में भेज दिया. गुरुभजन ने बताया कि बोगड़ा में स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया मैं भी उनका खाता है जहां उसकी हर महीने की पगार आती थी स्टेट बैंक के एक कर्मचारी के मिलीभगत से राजाराम केवट मेरे हर महीने की पगार उठाता था. देखा जा रहा कि इस तरह का गोरखधंधा बैंकों के अंदर बैठकर दलाल ईसीएल कर्मी का लोन पास करवाकर भारी रकम उनसे वसूल करते हैं. सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस तरह की घटना निघा में स्थित केनरा बैंक में भी देखी जा रही है .ईसीएल कर्मी ज्यादातर सूदखोरों के चुंगल में फंसे हुए हैं जब ईसीएल कर्मी अपने कार्य से सेवानिवृत्ति होते हैं तो सूदखोर अपने ब्याज का पैसा जोड़कर इतनी बड़ी रकम कर देते हैं कि ईसीएल कर्मी को मजबूरन उतना पैसा सूदखोर को देना पड़ता है. ईसीएल कर्मी अपना पूरा जीवन कार्य करने में लगा देता है परंतु जब सेवानिवृत्ति होता है तो उसके हाथ पैसे के रूप में कुछ नहीं लगता है सूदखोर और दलाल बैठे बैठे उनकी कमाई को एक झटके में ले लेता है. इस तरह की घटना लगभग कोयला अंचल में हर कोलियरी में देखी जा रही है . सूदखोर एवं बैंक के द्वारा लोन कराने वाले दलाल जो लोन के नाम पर ईसीएल कर्मी से मोटी रकम कमाते हैं. बीते कई वर्षों से गुरुभजन का परिवार भाड़े के घर में रहता है जबकि वे एक ईसीएल कर्मी थे. कारण यह कि वो सूदखोर एवं दलालों के चुंगल में बुरी तरह फस चुका था. दलालों के द्वारा उसे दस हजार रूपये से मात्र पन्द्रह हजार रुपये के बीच घर का खर्चा चलाने के रूप में दिए जाते थे.


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