आसनसोल : काजी नजरूल विश्वविद्यालय के वीसी पर मनमानी करने एवं भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। विश्वविद्यालय के राजिष्ट्रार, शिक्षक और विश्वविद्यालय कर्मियों ने वीसी पर आर्थिक भ्रष्टाचार का संगीन आरोप लगाया है। इसको लेकर शिक्षकों ने विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति साधन चक्रवर्ती के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। मालुम हो कि सोमवार को को विश्वविद्यालय के रजिस्टार चंदन कोनार को वीसी निलंबित कर दिया था जिसके कारण मंगलवार की सुबह जब वे विश्वविद्यालय में आए तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें विश्वविद्यालय में प्रवेश करने पर रोक लगा दी। उन्होंने पूछा कि यह रोक क्यों लगाई जा रही है, तो सुरक्षाकर्मियों ने कहा कि हाई अथॉरिटी के आदेश से उन्हें विश्वविद्यालय में प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा। क्योंकि उन्हें निलंबित कर दिया गया है। इसके बाद रजिस्टर चंदन कोनार ने अन्य शिक्षकों और विश्वविद्यालय कर्मियों को फोन से सूचित किया। वे लोग खबर सुनकर विश्वविद्यालय गेट पर पहुंचे और चंदन कोनार को विश्वविद्यालय परिसर के अंदर ले गए।इसके बाद कुलपति साधन चक्रवर्ती के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान स्कूल के सभी 103 शिक्षक, शैक्षणिक कर्मचारी और अधिकारियों ने कुलपति साधन चक्रवर्ती के खिलाफ 29 लाख रुपये के कार खरीदने, दो करोड़ रुपए का बंगला खरीदने, विद्यालय परिसर के अंदर के पेड़ को कटवा कर निजी उपयोग करने समेत 10 सूत्रीय शिकायत का पत्र कुलाधिपति डॉक्टर सीवी आनंद बॉस, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु के कार्यालय में भेजा। इस पत्र में दावा किया गया है कि कुलपति ने तरह-तरह से शिक्षकों और कर्मचारियों को प्रताड़ित कर रहे हैं।ऐसे पीड़ा से राहत दिलवाने के लिए यह पत्र दिया गया है। कुलपति बीते फरवरी माह में स्वयं सेवानिवृत्त हो गए हैं।उनको 3 महीने का एक्टेंशन दिया गया है।लेकिन उसका पत्र रजिस्टार के पास नहीं आया है। उन्होंने रजिस्ट्रार को निलंबित करने का निर्देश दिया है।जो कि उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर है। वही रजिस्टर चंदन कुमार ने बताया कि कुलपति साधन चक्रवर्ती ने शिक्षा विभाग के अनुमति के बिना निजी इस्तेमाल के लिए 29 लाख रुपये की एक कार खरीदी, दूसरा करीब 2 करोड़ रुपए की बंगले की खरीद के लिए एक करोड़ रुपये बिना विश्वविद्यालय प्राधिकरण अनुमति के पहले ही दिए जा चुके हैं। तीसरा करीब ₹3 लाख 70 हजार का एक टेलीविजन खरीदा गया है। जिसका कोई अनुमति नहीं लिया गया। वही यूजीसी के स्ट्राइड परियोजना से अनियमित रूप से लगभग ₹4 लाख निकाले गए हैं। विश्वविद्यालय से अपने बंगले को सजाने के लिए करीब सारे ₹ 7 लाख लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में विश्व विद्यालय परिसर में मौजूद कुछ बरसों पुराने पेड़ों को अवैध रूप से काटकर बेचा गया है। उन्होंने इस पैसा को कोई यूनिवर्सिटी फंड में रखने के बजाय अपने इस्तेमाल में लगाए। वही विश्वविद्यालय के एक शिक्षक ने कहा कि अभी विश्वविद्यालय में कोई कुलपति नहीं है। उन्होंने कहा कि महेश्वर बालादास को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वह 1 साल से कॉलेज परिसर में रह रहे हैं। हम लोगों की मांग है कि वे सभी अतिरिक्त प्रभार से त्याग दें और अभिलंब स्कूल परिसर से बाहर निकले।जबकि महेश्वर बलादास ने कहा कि विद्यालय परिसर में भवन का निर्माण हो रहा है। उसका वे देखरेख कर रहे हैं। कोरोना काल से ही वह विद्यालय परिसर में रह रहे हैं। क्योंकि 24 घंटा उन्हें निगरानी करनी पड़ती है। जिसके कारण वे यहां रह रहे हैं। हालांकि कुलपति साधन चक्रवर्ती से संपर्क करने की कोशिश किया गया। लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाई। इसलिए उनका पक्ष नहीं लिया जा सका।

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