रानीगंज- लाल झंडे के दुश्मनों से सिर्फ लाल झंडा लड़ रहा है, गरीबों की मांगों के लिए. 100 दिन के कार्य में तृणमूल कांग्रेस ने तालाब नहीं बल्कि समुद्र को चुराया है,जबकि भाजपा इन चोरों के खिलाफ एक भी प्राथमिकी दर्ज नहीं करा रही है. दरअसल भाजपा-तृणमूल एक दूसरे के पूरक हैं.
यह बात शनिवार की सांंध्यआ माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य आभााष राय चौधरी ने माकपा रानीगंज एरिया कमेटी के आह्वान पर शनिवार की शाम बांसड़ा में एक सभा के दौरान कहा .इस सभा मे माकपा पश्चिम बर्दवान जिला सचिव गौरांग चटर्जी , एरिया कमेटी सचिव सुप्रियो राय, कृष्णा दासगुप्ता, हेमंत प्रभाकर सहित अन्य मौजूद रहे. सभा की अध्यक्षता रानीगंज पूर्व विधायक नेता रूनू दत्ता ने किया.
इस सभा में काफी संख्या में लोग मौजूद थे, महिलाओं की उपस्थिति देखने लायक थी. आभास रॉय चौधरी ने कहा की तृणमूल भाजपा लोगों की पीड़ा कभी कम नहीं कर सकेगी , पश्चिम बंगाल के लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है, सामानों की कीमतें बढ़ रही हैं.
केद्र सरकार के सौतेले रुख को लेकर उन्होंने कहा कि ममता बैनर्जी को अकेले लड़ने की जरूरत नहीं है वह लोग भी उनके साथ हैं ,उनको सिर्फ यह घोषणा करना है कि कितना पैसा बाकी है जिससे यह पता चल जाए कि कितना पैसा सही में बाकी है और कितना पैसा टीएमसी द्वारा घोटाला किया गया है. वहीं केंद्र सरकार से भी उन्होंने सवाल किया कि अगर मनरेगा में घोटाला हुआ है तो पश्चिम बंगाल के एक भी बीडीओ एसडीओ या डीएम के खिलाफ एफआईआर क्यों नही दर्ज की गई . यह अधिकार तो केंद्र सरकार के पास है, लेकिन ऐसा न करके पैसा रोक दिया गया जिससे गरीब लोगों को असुविधा हो रही है.उन्होंने आरोप लगाया कि इससे साफ जाहिर होता है कि टीएमसी और भाजपा मिले हुए हैं । वहीं राहुल गांधी के मुद्दे पर भी उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कोई बयान दिया था जिसपर फरवरी 2023 ने मामला हुआ और मार्च आते आते उनकी सदस्यता चली गई, जबकि नारदा टेप कांड में टीएमसी के जिन लोगों को पैसा लेते हुए देखा गया वह आज या तो मंत्री हैं या फिर सांसद या विधायक . उन्पर कोई कार्यवाही नही हुई .
लाल झंडा जीवित रहने की मांग के साथ सभी धर्मों और जातियों के लोगों को एकजुट कर रखता है.
गौरांग चटर्जी ने पिछले पंचायत चुनाव की स्मृति को लोगों के सामने प्रस्तुत करते हुए कहा कि बांसड़ा की पंचायत की रक्षा की जाए.यहां की पंचायतें गरीबों को लूट रही हैं. उनके खिलाफ मेहनतकश लोगों के संघर्ष को मजबूत करते हुए पंचायतों का गठन किया जाना चाहिए.


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