आसनसोल : कोयला श्रमिकों का राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौता 11 लगभग 17 माह से लंबित है। इसको लेकर जेबीसीसीआई की सात बैठक हो चुकी हैं।लेकिन अभी तक एमजीबी पर कोई बात नहीं बनी है।जिसके बाद सभी केंद्रीय श्रम संगठनों ने मजदूरों के बीच जाने का फैसला लिया। इसी के तहत शुक्रवार को ईसीएल के विभिन्न कोलयरियों, क्षेत्रीय कार्यालयों और मुख्यालय में गेट मीटिंग का आयोजन किया गया। जिसमें धेमोमैन कोलयरी, नरसमुंदा कोलयरी, चिनाकुड़ी तीन नंबर कोलियरी,सोदपुर एरिया कार्यालय और संकतोड़िया मुख्यालय भी शामिल है। इस दौरान धेमोमेन कोलयरी इंकलाईन मे एटक, इंटक, सीटू एचएमएस, बीएमएस और टीयुसीसी के द्वारा गेट मीटिंग का आयोजन किया गया। इस मौके पर कौशिक हलदर, विनोद सिंह, अनिल सिंह, भीम प्रसाद नोनिया, दिनेश नोनिया उमेश तांती आदि उपस्थित थे। इस दौरान संबोधित करते हुए इंटक नेता विनोद सिंह ने कहा कि कोल इंडिया श्रमिकों की 10 वीं वेतन समझौता 30 जून 2021 को समाप्त हो चुकी है। 11वीं वेतन समझौता को लेकर 17 माह बीत चुके हैं। इसको लेकर जेबीसीसीआई की सात बैठकें हो चुकी है।लेकिन कोल इंडिया प्रबंधन 10.5% अधिक एमजीबी देने पर राजी नहीं है। जबकि यूनियनों की मांग है कि 28% एमजीबी दिया जाए। इसको लेकर प्रबंधन राजी नहीं है। दूसरा जो सबसे बड़ी मुद्दा है वह है डीपीई जिसके कारण वेतन बोर्ड लागू करने में बाधक बन रहा है। जब तक डीपीई गाइडलाइन में छूट नहीं दिया जाएगा। तब तक कोयला श्रमिकों की 11 वीं वेतन बोर्ड समझौता नहीं हो सकता। इसको लेकर सभी श्रम संगठन 7 जनवरी को रांची में एक सम्मेलन करेंगे। जिसके बाद आगे की रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा। लेकिन को श्रमिकों के पास अब एकमात्र विकल्प हड़ताल ही बचा है। जिसके लेकर सभी श्रमिकों को मानसिक तौर पर तैयार रहना जरूरी है। क्योंकि केंद्र में बैठी सरकार अंधी, गूंगी और बहरी है। जहां एक तरफ कोल इंडिया के तिमाही लाभ 2100 करोड़ रुपया है। वही श्रमिकों को वेतन बोर्ड देने में 660 करोड़ रुपए खर्च आएगी। लेकिन यह सरकार श्रमिकों को देना नहीं चाहती।


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