20 से 30 हजार की संख्या में जुटी थी संगत, सबने गुरबाणी पाठ सुनने के बाद छका लंगर
आसनसोल : गुरु नानक जयंती को गुरु पर्व, प्रकाश पर्व, गुरु पूरब कहा जाता है। इस दिन सिखों के पहले गुरु गुरुनानक देव जी का जन्म हुआ था। प्रकाश पर्व हर साल कार्तिक महीने के पूर्णिमा को मनाई जाती है। गुरुनानक देव जी ने ही सिख धर्म की स्थापना की थी। इस दिन सिख समुदाय के लिए लोग सुबह प्रभात फेरी निकालते हैं। गुरुद्वारे जाकर मत्था टेकते हैं व कीर्तन करते हैं। गुरु पर्व पर चारों ओर दीप जला कर रोशनी की जाती है। आसनसोल शिल्पांचाल में भी गुरुपर्व धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। सभी गुरुद्वारों को बेहतर ढंग से सजाया गया। इस अवसर पर आसनसोल बर्नपुर एवं क्षेत्र के अन्य गुरुद्वारों में गुरुवाणी की पाठ की गई।पटियाला पंजाब से विशेष रूप से बुलाए गए कीर्तनी जत्था जगतेस्वर सिंह ने गुरबाणी कीर्तन के माध्यम से संगतों को निहाल किया।वही ज्ञानी हरेंद्र सिंह अलवर वाले प्रचारक ने गुरबाणी कथा के द्वारा गुरु नानक साहिब जी के जीवन के बारे में संगत को अवगत कराया एवं गुरु नानक साहिब जी के उपदेशों पर चलने के लिए प्रेरित किया।उन्होंने कहा हमें गुरू नानक जी के आदर्शों को अपने जीवन में डालना होगा तभी जाकर हम लोग उस परमपिता के कार्यों को सफल कर सकेंगे। इस मौके पर आसनसोल गुरुद्वारा में आसनसोल के मेयर विधान उपाध्याय,उपमेयर अभिजीत घटक, वाशिम उल हक, चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी एवं नगर निगम के पार्षद गुरुदास चटर्जी, डाक्टर देबाशीष सरकार मत्था टेका।
इस बार गुरू नानक नगर कम्युनिटी हॉल में 20 हज़र से ऊपर की संख्या में श्रद्धालु आए थे। इस कार्यक्रम में प्रधान अमरजीत सिंह भरारा, सचिव बलजिंदर सिंह ढिल्लों, जॉइंट सचिव तलविंदर सिंह ढिल्लों, कैसियर अमरजीत सिंह उप्पल, उप प्रधान गुरचरण सिंह भरारा, सुखराज सिंह, दविंदर सिंह के अलावा अन्य गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।









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