आसनसोल : आसनसोल नगर निगम बोर्ड की बैठक हंगामेदार होने वाली थी क्योंकि गुलाम सरवर अभियंता उज्जवल बनर्जी का कार्यकाल बढ़ाने और विवादित अटवाल बिल्डिंग में चल रहे बाजार रिटेल प्राइवेट लिमिटेड का मुद्दा उठाने वाले थे। लेकिन उसके पहले ही मेयर ने सोमवार को बाजार रिटेल प्राइवेट लिमिटेड का लाइसेंस रद्द करने का पत्र निर्गत कर दिया। वही उज्जवल बनर्जी के विभाग को 4 अभियंताओं के बीच वितरण कर दिया। जिससे सत्तापक्ष को घेरने का मुद्दा विपक्ष के हाथ से निकल गया। लेकिन इसी बीच 41 नंबर वार्ड के तृणमूल कांग्रेस के पार्षद रणवीर सिंह उर्फ जीतू ने एक बयान जारी कर विपक्ष को मुद्दा दे दिया। उन्होंने कहा कि वे बोर्ड मीटिंग का बहिष्कार करेंगे। क्योंकि उन्हें बोर्ड मीटिंग में बोलने का अवसर नहीं दिया जाता है। इस पर आग में घी डालने का कार्य नगर निगम के चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी ने कर दिया। जब जीतू सिंह के बयान पर पत्रकारों ने चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी से प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने पार्षद जीतू सिंह को पागल की संज्ञा दे डाली। विपक्ष ने इस मुद्दे को हथियार बना लिया।जब पार्षद गुलाम सरवर को बोलने की मौका आई, तो उन्होंने इस पर विरोध जताते हुए कहा कि चेयरमैन को एक पार्षद को पागल कहना शोभा नहीं देता है। क्योंकि वह भी जनता के वोट से जीत कर आये है। इसके जवाब में चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी ने कहा कि उन्होंने पागल नहीं कहा है। लेकिन उनके बयान को जो लोग नहीं समझ सके हैं।उसके लिए मुझे अफसोस है। जबकि उपमेयर वसीम उल हक ने कहा कि चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी एक मंझे हुए नेता है। वह कभी ऐसा भाषा का प्रयोग नहीं कर सकते हैं।इसके बावजूद भी उन्होंने इस पर अफसोस जताया है। लेकिन दूसरे लोग भी जो बोलते हैं। उन्हें भी अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए।जबकि भाजपा पार्षद गौरव गुप्ता ने कहा कि चेयरमैन के द्वारा एक बुजुर्ग पार्षद को पागल कहना घोर निंदनीय है। उनकी भी वार्ड की समस्या है। वह बोर्ड बैठक में उठाना चाहते हैं। लेकिन उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता है।इससे साबित हो रहा है कि जब सत्ता पक्ष के पार्षद के साथ ऐसा व्यवहार हो रहा है, तो विपक्ष की कितनी सुनी जाती होगी। यह आसनसोल नगर निगम की जनता देख रही है। जबकि भाजपा पार्षद इंद्रानी आचार्य ने तो चेयरमैन की इस्तीफ़ा की मांग कर डाली। उन्होंने कहा कि चेयरमैन ने पार्षद को लेकर जो प्रतिक्रिया दी है। यह घोर निंदनीय है। वह अपने पार्टी के पार्षद को ही नहीं संभाल पाते हैं, तो उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें इस्तीफा दे देनी चाहिए।









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