आसनसोल : आसनसोल नगर निगम के पूर्व मेयर सह भाजपा के नेता जितेंद्र तिवारी ने ईसीएल कोयला खरीद मामले में भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज आरोप लगाया है। उन्होंने मंगलवार को आसनसोल स्थित अपने आवासीय कार्यालय में एक पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि कोल इंडिया के 8 अनुषांगिक कंपनी है। उसमें से एक ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड भी है।ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड प्रतिमाह 8 से 10 मेट्रिक टन कोयला ऑनलाइन बिक्री करता है। जो लोग यह कोयला खरीदते हैं। कोयला के अपने गंतव्य स्थल तक पहुंचाने के लिए सर्विस प्रोवाइडर रखते हैं। जिन्हें चालू भाषा में लिफ्टर कहते हैं। यह लोग ईसीएल के कोयला डिपो से कोयला को उठवा कर गंतव्य स्थान तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। इन्हें ऑनलाइन क्रेता कुछ रकम देते हैं। लेकिन सर्विस प्रोवाइडरों ने एक आरोप लगाया है कि इस साल में एक नया सिंडिकेट बना है। जो सर्विस प्रोवाइडर से प्रति टन ₹300 अतिरिक्त मांग रहे हैं। सिंडिकेट के लोगों का कहना है कि प्रशासन और कुछ नेता दुखी हैं। उन लोगों के पास पैसा पहुंचाना है। यदि यह पैसा नहीं दिया गया, तो उन लोगों का धंधा नहीं चलने देंगे। उन्हें किसी न किसी केस में फंसा दिया जाएगा। जितेंद्र तिवारी ने कहा कि यदि प्रतीक टन 300 रुपैया सर्विस प्रोवाइडर देंगे, तो वह अपने पॉकेट से नहीं देंगे। बल्कि कोयला पर ही दाम रख देंगे। इससे ईसीएल से जो लोग कोयला खरीदेंगे। वह महंगा हो जाएगा। क्योंकि प्रति टन ₹300 देने का अर्थ है 25 से 30 करोड़ रुपैया प्रतिमाह देना। यह छोटी रकम नहीं है। इससे जो कोयला के ग्राहक हैं। उन्हें महंगा कोयला मिलेगा, तो वे लोग दूसरे सब्सिडरी से कोयला खरीदना शुरू कर देंगे। दूसरा इससे पश्चिम बंगाल की बदनामी भी होगी। क्योंकि दूसरे राज्य से जो लोग यहां आकर कोयला का धंधा करते हैं। वह गलत संदेश देंगे। इसलिए मैंने 27 अक्टूबर को आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस कमिश्नर, पश्चिम बंगाल के पुलिस डीजीपी, कोयला सचिव और ईसीएल के सीएमडी को एक पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने इस मामले को जांच करने की मांग की है। इस आरोप में कितना सत्यता है इसका जांच पुलिस हीं कर सकती है। यदि यह सही है, तो ईसीएल के साथ साथ राज्य का भी नुकसान होगा। इससे यहां की अर्थव्यवस्था खराब हो जाएगी। इसलिए सभी को गंभीरता से इस मामले की जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसमें टीएमसी माकपा सभी को सहयोग करना चाहिए। क्योंकि कोई भी नहीं चाहेगा कि इस सिंडिकेट के कारण राज्य की बदनामी हो।

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