कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब विधानसभा के कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी राज्य सीआईडी मुख्यालय भवानी भवन पहुंचे। कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश के बाद वह दिल्ली से लौटने के तुरंत बाद शाम 5:50 बजे सीधे सीआईडी कार्यालय पहुंचे। अदालत ने उन्हें शाम 6 बजे तक जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया था।
सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी), जिसका नेतृत्व डीआईजी रैंक के एक अधिकारी कर रहे हैं, ने अभिषेक बनर्जी से तीन घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की। पूछताछ के दौरान कई दस्तावेजों और विधायकों के बयानों को लेकर उनसे विस्तृत जवाब मांगा गया।
हाई कोर्ट से तीन सप्ताह की अंतरिम राहत
इससे पहले दिन में कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की एकल पीठ ने अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत देते हुए अगले तीन सप्ताह तक उनकी गिरफ्तारी अथवा किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस अवधि के दौरान जांच जारी रहेगी और सीआईडी को प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने दलील दी कि 6 मई के प्रस्ताव पत्र, 9 मई को विधानसभा अध्यक्ष को दी गई जानकारी तथा 19 मई की बैठक से जुड़े दावों में गंभीर विसंगतियां हैं। उनके अनुसार, मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए हिरासत में लेकर पूछताछ आवश्यक है।
वहीं, अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अयान भट्टाचार्य ने कहा कि केवल तकनीकी विसंगतियों अथवा कथित बैकडेट हस्ताक्षरों के आधार पर जालसाजी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
CID की पूछताछ में उठे कई अहम सवाल
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान जांचकर्ताओं और हैंडराइटिंग विशेषज्ञों ने अभिषेक बनर्जी के समक्ष कई महत्वपूर्ण मुद्दे रखे।
सबसे पहले सीआईडी ने 6 मई की कथित बैठक की उस मूल "रेजोल्यूशन बुक" की मांग की, जिसमें लगभग 70 विधायकों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है।
इसके अलावा, बागी विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा की शिकायत के आधार पर अब तक 13 विधायकों के वीडियो बयान दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें वरिष्ठ विधायक अरूप राय और सुभाशीष दास सहित कुछ नेताओं ने कथित तौर पर दावा किया है कि दस्तावेजों में उनके नाम के साथ किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। सीआईडी ने इन बयानों के आधार पर अभिषेक बनर्जी से स्पष्टीकरण मांगा।
जांच एजेंसी ने विधानसभा सचिवालय को भेजे गए दस्तावेजों के कवरिंग लेटर पर मौजूद अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर का भी उल्लेख किया और यह जानने की कोशिश की कि पूरा दस्तावेज किसकी देखरेख में तैयार किया गया था।
भवानी भवन के बाहर कड़ी सुरक्षा
अभिषेक बनर्जी की पेशी को देखते हुए भवानी भवन और उसके आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कोलकाता पुलिस के अलावा केंद्रीय बलों की भी तैनाती की गई थी, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
टीएमसी के भीतर मतभेद भी आए सामने
इस मामले के बीच तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद भी खुलकर सामने आए हैं। पार्टी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चेतावनी भरे लहजे में अपनी नाराजगी जाहिर की अब समय आ गया है कि ममता बनर्जी को वरिष्ठ नेताओं (ओल्ड गार्ड) और अभिषेक बनर्जी (न्यू ब्रिगेड) में से किसी एक को चुनना होगा।"
साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि वह अभिषेक बनर्जी से जुड़े किसी भी कानूनी मामले में अब आगे कोई भूमिका नहीं निभाएंगे।
"जांच राजनीति से प्रेरित" : अभिषेक बनर्जी
पूछताछ के बाद सीआईडी मुख्यालय से बाहर निकलते समय अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से कहा,
"मैं कानून का सम्मान करता हूं और जांच में पूरा सहयोग कर रहा हूं, लेकिन मेरा मानना है कि यह पूरी जांच राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है।"
अब इस मामले में सीआईडी की अगली कार्रवाई और दो सप्ताह बाद होने वाली हाई कोर्ट की सुनवाई पर राजनीतिक हलकों और कानूनी विशेषज्ञों की नजरें टिकी हुई हैं। विधानसभा के कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में इसकी गूंज और तेज होने की संभावना है।

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