आसनसोल: बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की 189वीं जयंती के अवसर पर शुक्रवार को आसनसोल के बीएनआर मोड़ स्थित बंकिम-नजरुल-रवींद्र क्लब परिसर में भव्य 'वंदे मातरम् उत्सव' का आयोजन किया गया. वर्ष 1979 में स्थापित इस क्लब द्वारा आयोजित कार्यक्रम में संगीत प्रतियोगिता, विचार गोष्ठी और सम्मान समारोह जैसे विविध आयोजन हुए.
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह प्राथमिक कक्षा तक के बच्चों की रवींद्र संगीत प्रतियोगिता से हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने "आमरा सबाई राजा" और "आय तबे सहचरी" जैसे गीत प्रस्तुत किए. दोपहर में कक्षा पांच से नौ तक के छात्र-छात्राओं ने काजी नजरुल इस्लाम के देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी,वहीं शाम को आम नागरिकों के लिए 'वंदे मातरम्' गायन प्रतियोगिता आयोजित की गई.
शाम को "वर्तमान समय में वंदे मातरम् की प्रासंगिकता" विषय पर एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई. इसमें भाजपा के आसनसोल संगठनात्मक जिला उपाध्यक्ष प्रो. डॉ. तुषार रंजन बंद्योपाध्याय, कांग्रेस के प्रदेश सचिव प्रसेनजीत पुइतंडी, माकपा के पूर्व विधायक एवं अधिवक्ता अमिताभ मुखोपाध्याय, सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के पश्चिम बर्धमान जिला समिति सदस्य प्रदीप बंद्योपाध्याय, तृणमूल कांग्रेस के पश्चिम बर्धमान जिला महासचिव सुब्रत सिन्हा तथा उर्दू के वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक मोहम्मद वाजिउद्दीन जमाल ने अपने-अपने दृष्टिकोण से इस गीत के ऐतिहासिक और वर्तमान महत्व पर विचार रखे.कार्यक्रम का संचालन नीलोत्पल रायचौधरी ने किया.
इस अवसर पर साहित्यिक पत्रिका 'ताप उत्ताप' के 50 वर्षों से संपादक अमल बंद्योपाध्याय तथा 'आजकेर योधन' पत्रिका के 43 वर्षों से संपादक बसुदेव मंडल को सम्मानित किया गया. संगीत प्रतियोगिता के निर्णायक समर राय, कालाचांद घोष और मिंटू नाग थे.
कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायिका सोनाली काजी, पत्रकार देवयानी सिन्हा, कवि विकास गायेन, सौमेंदु रायचौधरी, सौरभ भादुड़ी, वाचिक एवं नृत्य कलाकार करबी रायचौधरी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे.
क्लब के सचिव कल्याण मंडल, संयुक्त सचिव प्रवीर चट्टोपाध्याय और सह सचिव दीपंकर मजूमदार ने कहा कि 'वंदे मातरम्' भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख प्रेरणास्रोत रहा है.वर्तमान समय में इस गीत को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच इसके रचयिता ऋषि एवं साहित्य सम्राट बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती मनाकर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया.


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