कोलकाता- :कोलकाता के बांसद्रोणी इलाके में स्थित एक नामी स्कूल की घोर लापरवाही के कारण तीसरी कक्षा के छात्र आयुष कुमार नाथ की मौत के मामले में अब राजनीतिक और प्रशासनिक सरगर्मी तेज हो गई है। घटना के 12 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस द्वारा किसी की गिरफ्तारी न किए जाने से क्षुब्ध होकर पीड़ित छात्र के माता-पिता ने न्याय के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मिलने का फैसला किया है। इसी सिलसिले में शनिवार को आयुष के पिता आशीष कुमार नाथ ने राज्य भाजपा मुख्यालय पहुंचकर पुलिस की निष्क्रियता की शिकायत दर्ज कराई
11 दिन कोमा में रहने के बाद तोड़ा दम
पारिवारिक सूत्रों और शिकायत के अनुसार, बीती 13 मई को बांसद्रोणी के 'महर्षि विद्या मंदिर' स्कूल में तीसरी कक्षा का छात्र आयुष कुमार नाथ अचानक बीमार पड़ गया था। आरोप है कि आयुष द्वारा अस्वस्थता की बात बताए जाने के बावजूद स्कूल प्रबंधन ने उसे कोई प्राथमिक चिकित्सा नहीं दी और न ही परिवार को सूचित किया। इसके विपरीत, उसे छठी पीरियड (6th Period) तक क्लास की आखिरी बेंच पर जबरन बैठाकर रखा गया।छुट्टी के समय स्कूल से बाहर निकलते समय अत्यधिक कमजोरी के कारण आयुष सीढ़ियों से गिर गया, जिससे उसके सिर पर गंभीर चोट आई। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 11 दिनों तक कोमा में जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद बीती 24 मई को मासूम आयुष की मृत्यु हो गई।पुलिसिया कार्रवाई न होने पर भाजपा दफ्तर पहुंचे परिजन
भाजपा नेता लॉकेट चटर्जी का अल्टीमेटम:
बेटे की मौत के बाद पिता आशीष कुमार नाथ ने 24 मई को ही स्थानीय नेताजीनगर थाने में स्कूल अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कराया था। कार्रवाई की मांग को लेकर 26 मई से ही स्कूल के बाहर अभिभावकों का विरोध-प्रदर्शन और घेराव जारी है।जब 12 दिन बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो निराश होकर परिजन न्याय की गुहार लगाने भाजपा कार्यालय पहुंचे। वहां मौजूद भाजपा नेता लॉकेट चटर्जी ने पीड़ित परिवार को सांत्वना दी और पुलिस को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि "अगर अगले 24 घंटे के भीतर दोषी स्कूल अधिकारियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो राज्य भाजपा नेतृत्व बड़े पैमाने पर थाने का घेराव और विरोध-प्रदर्शन करेगी।"मुख्यमंत्री से सीधे न्याय मांगेंगे माता-पिताआयुष के पिता आशीष नाथ ने मीडिया से कहा कि स्कूल की अमानवीयता और लापरवाही ने उनके बच्चे की जान ले ली है। पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है, इसलिए वे अब सीधे मुख्यमंत्री के पास जाकर लिखित शिकायत सौंपेंगे और न्याय की मांग करेंगे। इस घटना को लेकर स्थानीय अभिभावकों में स्कूल प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।

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