जामुड़िया: जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र स्थित रामाजी इस्पात प्राइवेट लिमिटेड में बिना किसी पूर्व सूचना के बंदी का नोटिस लगाए जाने के बाद 42 श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. शुक्रवार सुबह काम पर पहुंचे श्रमिकों ने फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर बंदी का नोटिस देखकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और गेट जाम कर तत्काल कारखाना चालू करने की मांग की.
कारखाना प्रबंधन की ओर से लगाए गए नोटिस में आर्थिक नुकसान और बाजार में मंदी का हवाला देते हुए 18 जून 2026 से उत्पादन बंद रखने तथा इस अवधि में "नो वर्क, नो पे" लागू करने की बात कही गई है.
करीब 10 वर्षों से कारखाने में कार्यरत श्रमिक मंगल माझी ने बताया कि गुरुवार तक काम सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन शुक्रवार सुबह अचानक बंदी का नोटिस देखकर सभी हैरान रह गए. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं है कि मालिक कौन है, लेकिन उनका रोजगार बना रहना चाहिए.
सीटू नेता बुद्धदेव रजक ने कहा कि यदि कारखाना मालिक इसे बेचने की प्रक्रिया में हैं तो भी पश्चिम बंगाल सरकार के कानून के अनुसार सभी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए.उन्होंने कहा कि पहले भी मालिक बदलने के बावजूद श्रमिकों की नौकरी प्रभावित नहीं हुई थी, ऐसे में इस बार श्रमिकों को बेरोजगार करना उचित नहीं है. उन्होंने सरकार, प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के बीच वार्ता की मांग की.
घटना की जानकारी मिलने पर भाजपा के जामुड़िया मंडल-3 के अध्यक्ष दीप बनर्जी भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने कहा कि अचानक कारखाना बंद कर श्रमिकों को बेरोजगार करना स्वीकार्य नहीं है. जब तक उत्पादन बंद है, तब तक श्रमिकों के परिवारों के भरण-पोषण की व्यवस्था पर भी विचार किया जाना चाहिए.
घंटो श्रमिकों का धरना जारी था, जबकि जामुड़िया थाना पुलिस मौके पर पहुंचकर स्थिति पर नजर बनाए रखते हुए अतिशीघ्र कारखाना प्रबंधन से बातचीत कर सकारात्मक पहल का आश्वासन श्रमिको को दिया.

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