जामुड़िया: जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र के केंदा ग्राम पंचायत इलाके में भू-धंसान की समस्या ने अब एक उग्र रूप ले लिया है. लंबे समय से धंसान के डर के साये में जी रहे ग्रामीणों का धैर्य सोमवार को जवाब दे गया. पुनर्वास की मांग को लेकर प्रभावित परिवारों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए ईसीएल की दो चालू खुली खदानों (ओसीपी) में उत्पादन और परिवहन पूरी तरह ठप कर दिया.
अनिश्चितता के बीच जी रहे हैं ग्रामीण
स्थानीय ग्रामवासियों का कहना है कि इलाके में आए दिन होने वाले धंसान के कारण उनका जीवन और जीविका दोनों दांव पर लगे हैं. बार-बार होने वाली दुर्घटनाओं ने सैकड़ों परिवारों के मन में दहशत पैदा कर दी है. ग्रामीणों का आरोप है कि पुनर्वास के मुद्दे पर ईसीएल अधिकारियों के साथ कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन नतीजा सिफर रहा. प्रशासन और प्रबंधन पर 'दोहरी नीति' अपनाने का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने कहा कि उन्हें केवल झूठे आश्वासन ही मिले हैं.
खदानों में काम बंद कर एजेंट कार्यालय का घेराव
विरोध की शुरुआत तब हुई जब धंसान प्रभावित केंदा क्षेत्र के 144 परिवारों ने एकजुट होकर इलाके की दो महत्वपूर्ण खुली खदानों में काम रुकवा दिया.खदानों में चक्का जाम करने के बाद आक्रोशित ग्रामीण कोलियरी एजेंट कार्यालय पहुंचे और वहां जमकर नारेबाजी व विरोध प्रदर्शन किया.इस घटना के कारण पूरे इलाके में भारी तनाव फैल गया।
पुलिस और सुरक्षा बल तैनात
बढ़ते तनाव को देखते हुए केंदा चौकी की पुलिस और ईसीएल के सुरक्षा बल तुरंत मौके पर पहुंचे. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे.
ग्रामीणों की चेतावनी: 'आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए'
प्रदर्शकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक पुनर्वास की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता या प्रबंधन की ओर से स्पष्ट लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक खदानों में कामकाज शुरू नहीं होने दिया जाएगा .ग्रामीणों के अनुसार हम सालों से मौत के मुहाने पर खड़े हैं.अगर जल्द ही हमारे पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी उग्र होगा.
दूसरी और ईसीएल अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट जवाब न मिलने के कारण स्थानीय ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन और खदानों में काम ठप जारी है.



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