"अब अटल-आडवाणी वाली भाजपा नहीं रही" – भाजपा छोड़ते ही राजेश मंडल के तीखे बोल
रानीगंज: विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़े रानीगंज में दलबदल की राजनीति ने चुनावी समीकरणों को गरमा दिया है। जैसे-जैसे मतदान का दिन करीब आ रहा है, नेताओं का पाला बदलने का दौर जारी है। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी को उस समय बड़ा झटका लगा, जब रानीगंज शहर मंडल के पूर्व भाजपा अध्यक्ष राजेश मंडल ने भाजपा का साथ छोड़कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन थाम लिया।
कालो बरण मंडल ने थमाया पार्टी का झंडा
एक सादे समारोह के दौरान रानीगंज से टीएमसी प्रत्याशी कालो बरण मंडल ने राजेश मंडल को पार्टी का झंडा थमाकर आधिकारिक रूप से उनका टीएमसी में स्वागत किया। इस अवसर पर रानीगंज टाउन टीएमसी अध्यक्ष व पार्षद ज्योति सिंह, पार्षद राजू सिंह सहित पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ता और समर्थक उपस्थित थे।
"मूल विचारधारा से भटक गई है भाजपा"
भाजपा छोड़ने के कारणों पर बेबाकी से जवाब देते हुए राजेश मंडल ने कहा कि उनका पार्टी से पूरी तरह मोह भंग हो चुका है। उन्होंने वर्तमान भाजपा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा की आज की भाजपा वैसी नहीं रही जैसी पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के समय में थी। पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक चुकी है और अब यहाँ पुराने कार्यकर्ताओं की लगातार अवहेलना की जा रही है.
राजेश मंडल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि बंगाल और रानीगंज में हुए अभूतपूर्व विकास कार्यों ने उन्हें प्रभावित किया है और वे इन कार्यों को और गति देने के लिए टीएमसी में शामिल हुए हैं।
भाजपा में पुराने कार्यकर्ताओं का अपमान: कालो बरण मंडल
इस मौके पर टीएमसी प्रत्याशी कालो बरण मंडल ने भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा में पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं का अपमान करना एक परंपरा बन गई है। उन्होंने कहा, "यही कारण है कि राजेश मंडल जैसे पुराने कार्यकर्ता का भी अपनी पार्टी से मोह भंग हो गया। आज पूरे बंगाल को पता है कि विकास का दूसरा नाम ममता बनर्जी है। राजेश जी के आने से रानीगंज में टीएमसी का संगठन और अधिक शक्तिशाली होगा।"
क्या बढ़ेगी भाजपा की मुश्किलें?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ऐन पहले राजेश मंडल जैसे संगठन से जुड़े अनुभवी नेता का भाजपा छोड़ना पार्टी के लिए भारी पड़ सकता है। राजेश मंडल की पकड़ स्थानीय कार्यकर्ताओं और मतदाताओं पर रही है, ऐसे में उनके जाने से रानीगंज के चुनावी मैदान में भाजपा को सांगठनिक और चुनावी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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