मुंबई | 12 अप्रैल, 2026 भारतीय संगीत जगत के लिए आज का दिन एक गहरे शोक का संदेश लेकर आया है। अपनी जादुई आवाज से आठ दशकों तक दुनिया को मंत्रमुग्ध करने वाली दिग्गज पार्श्वगायिका आशा भोंसले का आज 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके पुत्र आनंद भोंसले ने इस दुखद खबर की पुष्टि की है।
अंतिम समय और स्वास्थ्य
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आशा जी पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। 11 अप्रैल को कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) पड़ने के कारण उन्हें मुंबई के ब्रिच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद, आज मल्टीपल ऑर्गन फेलियर के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार आज शाम 4:00 बजे मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क श्मशान भूमि में किए जाने की संभावना है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मीं आशा भोंसले संगीत के पुरोधा पंडित दीनानाथ मंगेशकर की सुपुत्री थीं। पिता के असामयिक निधन के बाद, परिवार की जिम्मेदारी उनके और उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर के कंधों पर आ गई थी।
शुरुआत: मात्र 10 साल की उम्र में उन्होंने पहला मराठी गाना गाया।
हिंदी सिनेमा में कदम: 1948 में फिल्म 'चुनरिया' से उन्होंने बॉलीवुड में अपनी पारी शुरू की।
सफलता का दौर: 1950 के दशक में उन्हें असली पहचान मिली। विशेषकर 1957 में संगीतकार ओ.पी. नैय्यर के साथ फिल्म 'नया दौर' और 'तुमसा नहीं देखा' ने उन्हें लोकप्रियता के शिखर पर पहुँचा दिया।
विविधता और अद्वितीय पहचान
आशा भोंसले की सबसे बड़ी विशेषता उनकी बहुमुखी प्रतिभा थी। जहाँ उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर की गायकी सादगी और शुद्धता के लिए जानी जाती थी, वहीं आशा जी ने कैबरे, वेस्टर्न पॉप, गजल, शास्त्रीय संगीत और लोकगीतों में अपनी एक अलग और बोल्ड पहचान बनाई। 'दम मारो दम' और 'आजा आजा' जैसे गानों ने उन्हें युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया।आशा भोंसले सिर्फ एक गायिका नहीं, बल्कि अपने आप में एक संस्थान थीं।"
व्यक्तिगत जीवन और उपलब्धियां
निजी जीवन: 16 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने परिवार की इच्छा के विरुद्ध जाकर गणपतराव भोंसले से विवाह किया, हालांकि यह रिश्ता सफल नहीं रहा। बाद में उन्होंने मशहूर संगीतकार आर.डी. बर्मन (पंचम दा) से शादी की। इस जोड़ी ने संगीत के इतिहास में कई कालजयी नगमे दिए।
विश्व रिकॉर्ड: अपने करियर में उन्होंने 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए।
सम्मान: पद्म विभूषण (2008)
दादा साहब फाल्के पुरस्कार
कई फिल्मफेयर पुरस्कार
1997 में ग्रैमी पुरस्कार के लिए नामांकित होने वाली पहली भारतीय गायिका।
आशा भोंसले के निधन से संगीत की दुनिया में जो शून्य पैदा हुआ है, उसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। भले ही वह आज हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनके गीत 'ताकयामत' (कयामत तक) प्रशंसकों के दिलों में गूंजते रहेंगे।



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