आसनसोल: शहर की सड़कों पर रहने वाले लावारिस और बीमार कुत्तों की देखभाल के लिए आसनसोल नगर निगम (AMC) ने एक बड़ी पहल की है। शनिवार को आसनसोल के काली पहाड़ी इलाके के बागबंदी में एक अत्याधुनिक डॉग केयर सेंटर (कुत्ता देखभाल केंद्र) का विधिवत उद्घाटन किया गया। राज्य के कैबिनेट मंत्री मलय घटक ने फीता काटकर इस केंद्र की शुरुआत की।
इनकी रही उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण अवसर पर आसनसोल नगर निगम के मेयर विधान उपाध्याय, नगर निगम कमिश्नर एकम जे सिंह, सेक्रेटरी, चिकित्सा अधिकारी, विभिन्न वार्डों के पार्षद और निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
केंद्र में मिलेंगी ये सुविधाएं
इस केंद्र को बनाने का मुख्य उद्देश्य सड़क पर रहने वाले कुत्तों को सुरक्षित छत और चिकित्सा सुविधा प्रदान करना है। यहाँ निम्नलिखित सुविधाएं दी जाएंगी:
- आवास और भोजन: सड़कों से लाए गए कुत्तों के रहने और खाने-पीने का समुचित प्रबंध।
- निःशुल्क इलाज: घायल या बीमार कुत्तों का अनुभवी चिकित्सकों द्वारा उपचार।
- टीकाकरण (Vaccination): क्षेत्र के कुत्तों का नियमित टीकाकरण किया जाएगा ताकि रेबीज जैसी बीमारियों को रोका जा सके।
- नसबंदी कार्यक्रम: कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और मुख्यमंत्री के निर्देश पर पहल
उद्घाटन के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मेयर विधान उपाध्याय ने कहा, "हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नगर निगमों को सड़कों पर रहने वाले कुत्तों के लिए केंद्र बनाने का निर्देश दिया गया था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रेरणा और निर्देशों का पालन करते हुए, आसनसोल नगर निगम ने इस केंद्र का निर्माण किया है।"
NGO के साथ मिलकर होगा संचालन
मेयर ने बताया कि इस केंद्र का संचालन एक स्वैच्छिक संस्था (NGO) के सहयोग से किया जाएगा। शुरुआती चरण में यहाँ 10 कुत्तों को रखने की व्यवस्था की गई है। NGO के सदस्य शहर के विभिन्न हिस्सों से बीमार और घायल कुत्तों को यहाँ लाएंगे। इलाज और टीकाकरण के बाद, नियमानुसार उन्हें वापस उसी इलाके में छोड़ दिया जाएगा।
जनता से सहयोग की अपील
मेयर ने शहरवासियों से अपील करते हुए कहा, "जब एनजीओ के सदस्य कुत्तों को टीकाकरण या इलाज के लिए पकड़ने आएं, तो स्थानीय लोग विरोध करने के बजाय उनकी सहायता करें। यह अभियान जनहित और पशु कल्याण के लिए है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए नगर निगम ने अलग से बजट निर्धारित किया है, ताकि धन के अभाव में काम न रुके।

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