जामुड़िया- जामुड़िया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत रोटीबाटी ग्राम पंचायत के चापुई (सावड़ा) इलाके में जिला परिषद के फंड से बन रही नई ढलाई सड़क भ्रष्टाचार और विवादों के घेरे में आ गई है.लगभग 76 लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही 1100 मीटर लंबी इस सड़क में घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया.सबसे बड़ी बात यह है कि इस विरोध प्रदर्शन में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता ने अपने ही दल के जिला परिषद अध्यक्ष पर आरोप लगा कर रास्ते की गुणवत्ता की जांच की मांग की है. बाबू राय ने जिला परिषद अध्यक्ष पर ग्राम के विकास के मुद्दे पर सहयोग ने करने का आरोप लगाते हुए कहा की वर्ष 2019 से राज्य के मुख्यमंत्री दुर्गा पूजा के लिए संस्थाओं को आर्थिक अनुदान दे रही है एवं इस अनुदान के तहत चपुई ग्राम में होने वाले एकमात्र दुर्गा पूजा के लिए चपुई ग्राम सार्वजनिक दुर्गा पूजा कमेटी ने कई बार जिला परिषद अध्यक्ष विश्वनाथ बाउरी से अनुदान दिलाने का आवेदन किया, परंतु उन्होंने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह ग्राम का विषय है अतः आप लोग ही इस विषय को संभाले. तत्पश्चात 2023 में रानीगंज के विधायक सह आसनसोल दुर्गापुर विकास प्राधिकरण के तत्कालीन अध्यक्ष तापस बनर्जी के पास आवेदन किए जाने पर 2023 से दुर्गा पूजा का अनुदान मिलना आरंभ हुई है. जबकि विश्वनाथ बाउरी के जिला परिषद के अध्यक्ष नियुक्त होने के पीछे चपूई ग्राम सीट का भी अवदान है.
धूल से लोग हो रहे बीमार, पुरानी सड़क का दिया हवाला
स्थानीय निवासी राकेश लायेक और अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के तुरंत बाद ही उसकी ऊपरी परत उखड़ने लगी है.आलम यह है कि पूरे क्षेत्र में सीमेंट की धूल उड़ रही है, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है और वे विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. राकेश लायेक ने कहा, पहले भी यहाँ ढलाई सड़कें बनी थीं, लेकिन कभी ऐसी धूल नहीं उड़ी. इस बार सड़क बनते ही सीमेंट उखड़ रहा है, जिससे जीना मुहाल हो गया है.
अपनी ही सरकार के खिलाफ उतरे तृणमूल नेता
हैरानी की बात यह है कि इस विरोध प्रदर्शन में आम जनता के साथ-साथ जामुड़िया ब्लॉक-1 तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिक बाबू रॉय भी शामिल हुए.उन्होंने आरोप लगाया कि लाफार्ज सीमेंट के नाम पर निम्न स्तर की सीमेंट औऱ सामग्री का उपयोग हुआ है.सीमेंट की मात्रा में भारी कटौती की गई है।.काम का 'वर्क ऑर्डर' दिखाने में कोताही बरती जा रही है.वामपंथी शासन काल की 'बेनेफिशरी कमेटी' (6 सदस्यीय समिति) जैसी पारदर्शिता अब गायब है.
बाबू रॉय ने मुख्यमंत्री की पारदर्शिता की नीति का हवाला देते हुए मांग की कि जिला परिषद अध्यक्ष इस सड़क का वैज्ञानिक तरीके से नमूना परीक्षण कराएं ताकि सच सामने आ सके.
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और तनाव
विवाद बढ़ता देख रोटीबाटी ग्राम पंचायत की प्रधान देविका चटर्जी और अन्य पंचायत सदस्य मौके पर पहुंचे. प्रधान ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह सड़क जिला परिषद के सभापति विश्वनाथ बाउरी के प्रयासों से बनी है.उन्होंने इसे चुनाव से पहले सत्ता पक्ष को बदनाम करने की साजिश करार दिया और ग्रामीणों से लिखित शिकायत की मांग की.
स्थिति को तनावपूर्ण होते देख निमचा पुलिस फांड़ी की नवनियुक्त लेडी इंस्पेक्टर नसरिन सुल्ताना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं और लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया.
सभापति की सफाई: नियमों के तहत हुआ है काम
इस पूरे मामले पर पंचायत समिति के सभाधिपति विश्वनाथ बाउरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी और मानक सीमेंट का ही प्रयोग किया गया है.धूल उड़ने के सवाल पर उन्होंने दलील दी कि ढलाई के बाद सड़क को कम से कम 12 दिनों तक बंद रखना चाहिए, लेकिन यह चालू रास्ता होने के कारण 3 दिनों में ही इस्तेमाल होने लगा, जिससे धूल उड़ रही है. कुछ लोग खुद को चमकाने के लिए बेवजह विरोध कर रहे हैं.
जांच की मांग
फिलहाल इलाके में शांति है, लेकिन ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—सड़क की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच हो और धूल की समस्या से तत्काल राहत दी जाए. अब देखना यह है कि प्रशासन इस तकनीकी खामी की जांच कराता है या यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में दबकर रह जाता है.


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