जामुड़िया- जब पूरे पश्चिम बंगाल में महालय के साथ दुर्गा पूजा का उत्सव शुरू हुआ, जामुड़िया नामोपाड़ा प्राथमिक विद्यालय और बी.बी. कॉलेज, आसनसोल ने मिलकर एक ऐसा नेक कार्य किया, जिसने त्योहार के असली सार—मानवता और करुणा—को दर्शाया. दोनों संस्थानों ने एक संयुक्त पहल के तहत आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों को नए कपड़े वितरित किए, जिससे उनके चेहरे पर खुशी की रौनक आ गई.
छात्रों ने अपनी बचत से दिए नए कपड़े
इस कार्यक्रम में जामुड़िया नामोपाड़ा प्राथमिक विद्यालय के लगभग 100 छोटे बच्चों (प्री-प्राइमरी से कक्षा 3 तक) को नए वस्त्र दिए गए. इस पहल का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह था कि इन कपड़ों का खर्च बी.बी. कॉलेज के उन छात्रों ने उठाया, जिन्होंने अपनी टिफिन खर्च से पैसे बचाए थे.इन छात्रों ने, जो खुद कई सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, दूसरों के लिए उदारता का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया. इस कार्य में कॉलेज के प्रोफेसरों ने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया.
शिक्षा की नई परिभाषा: समग्र और सर्वांगीण विकास
विद्यालय के प्रधानाध्यापक दीप नारायण नायक जिन्हें रास्ते का मास्टर भी कहा जाता है,उन्होंने इस पहल को केवल सहायता का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा की एक जीवंत प्रयोगशाला बताया. उन्होंने कहा कि भारत सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, उनका उद्देश्य बच्चों का समग्र और सर्वांगीण विकास करना है. उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में सिर्फ कपड़े या शैक्षणिक सामग्री ही नहीं, बल्कि बच्चों के लिए कौशल विकास कार्यशालाएँ और सह-पाठ्यचर्या गतिविधियाँ भी आयोजित की जाएँगी ताकि वे अकादमिक, सांस्कृतिक और नैतिक रूप से विकसित हो सकें.
इस कार्यक्रम का वर्चुअल उद्घाटन पश्चिम बर्धमान जिला प्राथमिक विद्यालय परिषद के अध्यक्ष रथीन्द्रनाथ मजुमदार, बी.बी. कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमिताभ बसु और वाणिज्य विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ. शांतनु मल्लिक ने किया.
श्री मजुमदार ने इस पहल को "समग्र शिक्षा का अनुकरणीय मॉडल" बताया, जबकि डॉ. बसु ने कहा कि "वंचित बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाना ही असली शिक्षा है."
बच्चों के चेहरे पर आई खुशी
कक्षा 1 की एक आदिवासी छात्रा ईशिका कोड़ा ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा, "यह मेरे जीवन का पहला पूजा का नया कपड़ा है. आज सचमुच लग रहा है कि दुर्गा पूजा आ गई है."
कार्यक्रम में उपस्थित अवर विद्यालय निरीक्षक अरिजीत मंडल ने भी इस पहल की सराहना की और इसे "समानता और मूल्य-आधारित शिक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण" बताया.
यह भी उल्लेखनीय है कि कक्षा 4 और 5 के बच्चों को 26 अक्टूबर को नए कपड़े दिए जाएँगे, जिसमें मिशन उड़ान वेलफेयर फाउंडेशन, रानीगंज सहयोग करेगा.यह पहल दर्शाती है कि जब संस्थान मिलकर काम करते हैं तो शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन जाती है.



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