कोलकाता (पीबी टीवी)मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़े ही प्यार से जिस बाघ का नाम 'सोहन' रखा था , अब वह नहीं रहा। लंबी बीमारी के कारण झारखाली बाघ पुनर्वास केंद्र में उनकी मृत्यु हो गई।
शनिवार को वन विभाग की ओर से इस खबर की पुष्टि की गई। मुख्यमंत्री ने 2012 में जब झारखाली बाघ पुनर्वास केंद्र का उद्घाटन किया था, तब उन्होंने दोनों बाघों का नाम 'सोहन' और 'सोहानी' रखा था। सुंदरबन में विचरण करने वाले इन दो बाघों को संरक्षण के लिए लाया गया था। सोहानी की कुछ दिन पहले ही मौत हो गई थी और अब सोहन भी ऐसी जगह पलायन कर गया है जहां से वापसी संभव नहीं है। 2009 में सोहन बार-बार सतजेलिया गांव के आसपास घूमते देखा जाता था। बाद में वन विभाग ने उसे पकड़ लिया और शुरू में उसे अलीपुर चिड़ियाघर में रखा। इसके बाद इसे झारखाली बाघ पुनर्वास केंद्र में स्थानांतरित कर दिया गया। 22 वर्षों से सोहन पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण था। हालाँकि जैसे-जैसे उम्र बढी उसे विभिन्न शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ा। उसकी बायीं आँख में मोतियाबिंद था, जिसके कारण वह देख नहीं सकता था। डॉक्टरों की नियमित निगरानी के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। सोहन की मौत से न केवल झारखली के कर्मचारी बल्कि कई पर्यटक भी सदमे में हैं। यद्यपि उसका अकेलापन दूर करने के लिए एक नया बाघ लाया गया था, फिर भी सोहन संतुष्ट नहीं था। राज्य के वन्यजीव शाखा के निदेशक नीलांजन मल्लिक ने कहा, "सोहन की उम्र लगभग 22 वर्ष थी, जो एक बाघ के औसत जीवनकाल के करीब है।" "उनकी मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई, वृद्धावस्था से संबंधित बीमारियों के कारण।" झारखली पुनर्वास केंद्र में अब केवल एक बाघ रह गया है। नए बाघ लाने की योजना तो बन सकती है, लेकिन सोहन और सोहनी की जगह कोई नहीं भर सकता


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