रानीगंज: रानीगंज के बांशड़ा में बिरसा मुंडा के जन्म जयंती पर आयोजित आदिवासी तीरंदाजी प्रतियोगिता ने न्याय की मांग और सांस्कृतिक उत्सव का एक अनूठा संगम देखा गया.
महिलाओं ने इस प्रतियोगिता को न केवल एक खेलकूद का आयोजन बल्कि आर जी कर की पीड़िता के लिए न्याय की मांग का मंच बना दिया. उन्होंने सड़कों पर बड़ी संख्या में अल्पनाएं बनाईं, जिन पर पीड़िता की तस्वीरें और न्याय की मांग के संदेश लिखे थे.
तीरंदाजी प्रतियोगिता: एकता और साहस का प्रतीक:
इस वर्ष की तीरंदाजी प्रतियोगिता में पिछले वर्ष की तुलना में अधिक संख्या में प्रतिभागी शामिल हुए.करीब 800 महिला- पुरुषों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया. महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने इस प्रतियोगिता को और अधिक सशक्त बना दिया. ईख और बांस से बने पारंपरिक धनुषों के साथ तीरंदाजों ने अपनी निशानेबाजी का प्रदर्शन किया.यह प्रतियोगिता न केवल शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन थी बल्कि आदिवासी समुदाय की एकता और साहस का भी प्रतीक थी
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां:
तीरंदाजी प्रतियोगिता के साथ-साथ दशई नृत्य, परम नृत्य और लगारे नृत्य ने भी दर्शकों का मन मोहा. ऑर्केस्ट्रा द्वारा प्रस्तुत आदिवासी गीतों ने उत्सव का माहौल बनाए रखा. यह सब मिलकर एक अद्भुत सांस्कृतिक अनुभव था.
इस आयोजन में कोयला खनन के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कोयला खदान प्रबंधन द्वारा कोयला खनन विधि और जल शुद्धिकरण प्रक्रिया का मॉडल भी प्रदर्शित किया गया था. यह स्थानीय लोगों को कोयला खनन के प्रभावों के बारे में समझने का मौका दिया गया.
आयोजकों सदस्य संजय हेम्ब्रम ने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और आदिवासी समुदाय की परंपराओं को जीवित रखने का संकल्प लिया. यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव था बल्कि न्याय की मांग और एकजुटता का भी एक मजबूत संदेश था.


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