दुर्घटना को आमंत्रण देता निघा ओसेपि,बिना फेंसिंग के चल रहा ओसेपि



 जामुड़िया - निघा ओसीप पेंच के चारों तरफ फेंसिंग किये बगैर किया जा रहा है उत्पादन .जिसके कारण कभी भी किसी समय हो सकती है बड़ी दुर्घटना.ईसीएल के सातग्राम श्रीपुर एरिया क्षेत्र के अधीन श्रीपुर एरिया में आने वाले दो कोलियरी शिवडागा एसएसआइ कोलियरी एवं निघा कोलियरी सालों पुर्व मैनेजमेन्ट द्वारा बंद कर दिया गया. निघा कोलयरी पर भी बंद के लिए खतरा मंडरा रहा है .इस एरिया क्षेत्र को बचाये रखने के लिए इस एरिया के पुर्व महाप्रबंधक ने शिवडागा मोड़ स्थित निघा ओसीपी पेंच का नींव रखी थी, ओर इसी वर्ष पुजा अर्चना कर इसे चालु किया गया था. इस ओसीपी को सही रूप से उत्खनन करने का कार्य नामी कंपनी हिन्दुस्तान कंस्ट्रक्शन को दिया गया , एवं इस ओसीपी से लिफ्टिंग का कार्य स्थानीय ट्रांसपोर्टर का को दिया गया था यह ओसीपी सम्पूर्ण रूप से चालू होने के पश्चात इसमें उत्पादन जोरो शोरो से शुरू हुआ. तब कुछ माह तक यहाँ पर बगैर वजन काँटा बनाये ट्रांसपोर्टिंग का कार्य धड़ल्ले से चला, जिसका विरोध सभी श्रमिक संगठन ने किया. इन लोगों की यह माँगे थी कि सर्व प्रथम यहाँ पर वजन काँटा हो फिर यहाँ से सातग्राम साइडिंग में कोयला का ट्रांसपोर्टिंग करे .इस आंदोलन के कारण कुछ माह तक यहाँ पर कार्य बंद रखा गया था फिर महिनों बाद यहाँ पर वजन काँटा का निर्माण करवाया गया .अब इस ओसीपी में सबसे बड़ी सवालिया निशान खड़ा यह है कि इतने बड़े ओसीपी होने के बावजूद भी अभी तक इस ओसीपी में सुरक्षा की दृष्टिकोण से कुछ भी नहीं है .इस ओसीपी के चारों तरफ बिना फेंसिंग किये यहां के मेनेजमेन्ट इसे नजर अंदाज कर बेख़ौफ़ हो कर कार्य कर रहे हैं, जिसके कारण कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है .इसे लेकर श्रीपुर एरिया जेसीसीआई सदस्य एवं बीजेएमएम संगठन से जुड़े नेता प्रमोद पाठक का कहना है कि इस ओसीपी को जब चालु किया गया था तब हमलोगो को यह उम्मीद जगी थी कि यह पर कोई भी जब कार्य होगा इसीएल के नियम अनुसार होगा, लेकिन उस नियम को दर किनार करते हुए यहां पर कार्य किया जा रहा है. कुछ महिनों तक यहां पर बगैर कांटा किये हुए कोयला लोड वाहनों को सातग्राम साइडिंग में भेजा जाता था. इस दौरान क्या होता था, यह तो सोचने की बात थी. जब यहां के सभी युनियन ने इसका विरोध किया तो भय के कारण कुछ माह तक बंद कर वज़न कांटा बनाया गया. अभी सबसे बड़ी समस्या यहा पर उत्पन्न यह हो रही है कि इस ओसीपी के चारों तरफ बगैर फेंसिंग के ही कार्य किया जा रहा है .फेसिंग नहीं होने के कारण ओसीपी में पशु एवं मनुष्य कभी भी गिर कर दुर्घटना का शिकार हो सकते है. इसे लेकर इसीएल मुख्यालय सकतोड़िया में जाकर 20 दिनों पूर्व - डायरेक्टर पर्सनल से बात विमर्श करके आया की सबसे महत्वपूर्ण विषय सुरक्षा है. उन्होंने ने हमारी बातों को गंभीरता पूर्वक सुना. यहां पर सरकारी सम्पत्ति की लुट मची हुई है जिसकी जांच इडी ओर सीबीआई के द्वारा होनी चाहिए, तभी यहां की सच्चाई सब लोगों की सामने आयेगी, नहीं तो आने वाले समय में हमलोग इसे लेकर आंदोलन करने पर मजबुर हो जायेंगे. वहीं इस विषय में शिवडागा एसएआई कोलियरी केकेएससी के अध्यक्ष नारायण साव ने कहा कि यहां पर ओसीपी हुआ है वह तो अच्छी बात है लेकिन जिन लोगों को ओसीपी चलाने का दायित्व दिया गया है वह ठीक से इसे नहीं निभा रहे है. इसके पहले भी काली पहाड़ी ओसीपी में भी इस तरह का कार्य उन्होंने ने किया था. सबसे बड़ी ताज्जुब की बात यह है कि इतने बड़े ओसीपी में सीसीटीवी कैमरे केवल वज़न कांटा पर ही लगे हुए है ओर कहीं भी नहीं हैं .इसके चारों ओर कोई घेरा बंदी भी नहीं है, जिसके कारण कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है .इस सरकारी सम्पत्ति की सुरक्षा जिसकी जिम्मेदारी है. वह यहां पर एक चक्कर लगा कर चला जाता है .इसको मैनेजमेंट की ओर से उच्च लेवल पर जांच होनी चाहिए. इसके पीछे क्या कारण है उसे हमलोग भी जानने का प्रयास कर रहे है.दुसरी और इस विषय में एरिया महाप्रबंधक उपेंद्र सिंह से मोबाइल पर प्रतिक्रिया लेने के लिए बात करने का प्रयास किया गया,पर उनसे संपर्क नहीं हो पाया.

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