(एस एस ठाकुर की विशेष रिपोर्ट)
भूगर्भिय आग, गैस और धंसान से प्रभावित रानीगंज कोयलांचल को बचाने के लिए वर्ष 1922 में बनी थी पहली कमेटी
126 अस्थिर स्थानों पर बसे 28,769 परिवारों को बचाने के कछुए की रफ्तार से चल रहा है कार्य
वर्ष 2019 तक पूरा होना था पुनर्वास का कार्य, 2023 तक सिर्फ 160 परिवारों को ही किया गया शिफ्ट
शीर्ष निगरानी समिति ने वर्ष 1992 में 49 और 1995 में 21, सीएमपीडीआइएल ने दो कुल 72 इलाकों को भूधंसान और आग से प्रभावित के कारण माना गया असुरक्षित
वर्ष 1905 में देश की कुल 276 कोयला खदानों में से 246 अकेले रानीगंज कोयलांचल में थी
आसनसोल. रानीगंज कोलफील्ड एरिया (आरसीएफए) पुनर्वास परियोजना के तहत चिन्हित 142 में से 126 अस्थिर स्थानों पर बसे संभावित 28,769 परिवारों, जिसमें 22,668 नन लीगल टाइटल होल्डर (एनएलटीएल) जो सरकारी जमीन पर बसे हैं और 6101 लीगल टाइटल होल्डर (एलटीएच) जिनका खुद के जमीन पर मकान बना है, को भूमिगत आग, गैस व भूधंसान से प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकाल कर दूसरे जगह बसाने का कार्य कछुए की रफ्तार से चलने से लोगों की जान माल पर हमेशा खतरा बना हुआ है. चिन्हित 142 अस्थिर स्थानों में से 10 पर अवादी नहीं है, तीन को इसीएल ने शिफ्ट कर दिया है, दो जगह के लोगों के विरोध के कारण वहां सर्वे नहीं हुआ और एक जगह का नाम दो बार आ गया. इसप्रकार बचे 126 स्थानों पर बसे लोगों को शिफ्ट करने को लेकर परियोजना का कार्य चल रहा है. वर्ष 2004 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर अस्थिर स्थानों पर बसे लोगों के पुनर्वास को एक्शन प्लान का कार्य आरंभ हुआ. वर्ष 2009 में पुनर्वास परियोजना को केंद्र सरकार से आर्थिक मंजूरी मिलने के बाद 10 वर्षों के अंदर इसे पूरा करने का लक्ष्य था. लेकिन प्रभावित 22,668 एनएलटीएच परिवारों में से सिर्फ 160 को अबतक नये आवास का चाबी सौंपा गया है. एलटीएच परिवारों को लेकर अभी तक कोई पैकेज ही नहीं बन पाया है. उनके आवास व जमीन के बदले मुआवजा क्या होगा? इसपर चर्चा ही चल रही है. तीन प्रखंड जामुड़िया, अंडाल और बाराबनी में कुल चार प्रोजेक्ट में 10,044 फ्लैट बनाने का कार्य चल रहा है. यह सारे एनएलटीएच परिवारों के लिए हैं. बाकी परिवारों को लेकर अभी तक कोई प्लान तैयार नहीं हुआ है.
क्या है रानीगंज कोयलांचल में कोयला खनन का इतिहास?
वर्ष 1774 में ईस्ट इंडिया कंपनी के जॉन सुमनेर और सुएटोनियस ग्रांट हिटली को रानीगंज कोयलांचल के एथोड़ा सालानपुर में कोयला मिला और सर्वप्रथम कोयला खनन यहां प्रारंभ हुआ. प्रारंभिक अन्वेषण और खनन का कार्य अव्यवस्थित तारीके से हुआ. ईस्ट इंडिया कंपनी ने वर्ष 1813 इसके एकाधिकार को रद्द कर दिया. वर्ष 1820 में कोयला का नियमित खनन मेसर्स एलेक्जेंडर एंड कंपनी के नेतृत्व में शुरू हुआ. वर्ष 1835 में प्रिंस द्वारिकानाथ टैगोर की पहली भारतीय कोयला कंपनी मेसर्स कैर एंड टैगोर की स्थापना हुई और इसने सभी कोलियरियों को खरीद लिया. वर्ष 1843 में विलियम प्रिंसेप के हस्तक्षेप से कैर, टैगोर एंड कंपनी ने गिलमोर होम्ब्रे एंड कंपनी से हाथ मिलाया और संयुक्तरूप से मेसर्स बंगाल कोल कंपनी की स्थापना हुई. वाष्पचालित रेलगाड़ी के आरंभ होने से कोयले की मांग काफी बढ़ गयी और एक के बाद एक नयी कोयला खदानें खुलने लगी. वर्ष 1905 में देश में स्थित कुल 276 कोयला खदानों के से अकेले रानीगंज कोयलांचल में 246 खदानें थी.
कोयला निकालने की अंधाधुंद होड़ में सुरक्षा के साथ हुआ खिलवाड़, खामियाजा भुगत रहे आज
कोयला निकालने की होड़ में सुरक्षा के नियमों का कोई परवाह नहीं किया गया. सैकड़ों खदानें बनी और अवैज्ञानिक तरीके से खनन शुरू हुआ. जिसे लेकर भूधंसान की घटनाएं शुरू हुई. वर्ष 1922 पहली धंसान समिति का गठन माइनिंग मेटलर्जिकल एंड जियोलॉजिकल इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा किया गया. अनेकों बाधाओं के बावजूद समिति को थोड़ी सफलता मिली. वर्ष 1935 में दूसरी कमेटी का गठन हुआ, जिसने अपनी रिपोर्ट में खदान धंसने के कारण होनेवाले खतरे को कम करने के लिए उपचारात्मक उपायों की सिफारिश की थी. आजादी के बाद वर्ष 1950 में तत्कालीन डिपार्टमेंट ऑफ माइन्स वर्तमान में खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) ने इसे लेकर जागरूकता फैलाने का कार्य किया. कोयला खदानों के राष्ट्रीयकरण से पूर्व पर्यावरण और इसकी सुरक्षा के प्रति चिंता व्यवहारिक रूप से अस्तित्वहीन थी. वर्ष 1973 में टिस्को और इस्को को छोड़कर देश की कुल 711 निजी कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण हो गया. इसके उपरांत बागची समिति, प्रसाद समिति आदि समितियों ने रानीगंज कोयला क्षेत्र में पुराने कामकाज से उत्पन्न खतरों को लेकर जांच की थी और अनेकों जगहों को असुरक्षित घोषित किया था. वर्ष 1978 में केंद्र सरकार द्वारा गठित एक समिति ने भूधंसान वाले क्षेत्रों की जांच की और असुरक्षित क्षेत्रों को चिन्हित कर यहां निर्माण कार्य की रोकथाम के लिए राज्य सरकार को अनुशंसा भेजी. जिसके उपरांत पश्चिम बंगाल प्रतिबंध अधिनियम 1979 कानून बनाया. राज्य सरकार ने रानीगंज कोयला क्षेत्र के लिए शीर्ष निगरानी समिति (एएमसी) का गठन किया. कोल इंडिया के परामर्श से रानीगंज कोलफील्ड एरिया की संभावित धंसान की समस्या सहित विभिन्न पर्यावरणीय समस्यायों को सुधारने के लिए अपनाये जाने वाले उपायों का सुझाव देने का काम समिति को सौंपा गया. इस समिति ने जून 1992 में 49 इलाकों को अस्थिर के रूप में चिन्हित किया. पुनः सितम्बर 1995 में 21 और अस्थिर जगहों को तथा इसीएल और सीएमपीडीआइएल ने दो जगहों को चिन्हित किया. इसप्रकर रानीगंज कोयलांचल में कुल 72 इलाकों को भूमिगत आग और धंसान से प्रभावित होने के कारण असुरक्षित घोषित किया गया.
उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट में हुआ खुलासा 5174 धंसान की हुई घटनाएं
एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1997 में कोयला मंत्रालय के सचिव ने रानीगंज कोयलांचल में भूधंसान की घटना पर जांच कर रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया था. कमेटी ने चार वर्षों तक अपने अध्ययन के बाद कहा कहा कि वर्ष 2000 तक रानीगंज कोयलांचल में कुल 5174 धंसान की घटनाओं का उल्लेख किया. यह धंसान की घटना दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और कोयलांचल में नियमित धंसान की घटना अबतक चल रही है. दो दिन पूर्व आलडी गांव में धंसान हुई. सात घर, एक सामुदायिक भवन, दो दुकान, 150 मीटर मुख्य सड़क धंसान से प्रभावित हुई. यह गांव भी पुनर्वास की सूची में शामिल है.
आसनसोल के तत्कालीन सांसद हारधान राय ने सर्वोच्च न्यायालय में दायर की जनहित याचिका
इलाके की भयावह समस्या को देखते हुए आसनसोल के तत्कालीन सांसद और सीटू नेता हाराधन राय ने वर्ष 1997 में सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका (डब्ल्यूपी संख्या. 381/1997) दायर की. जिसपर चली लंबी सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने 2004 में केंद्र सरकार को आदेश दिया कि इस समस्या से निबटने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाये और उसकी प्रति अदालत में भी जमा करें. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने मास्टर प्लान तैयार किया और 2009 ने मास्टरप्लान के आधार पर पुनर्वास परियोजना के लिये वित्तीय मंजूरी दे दी.
दो चरणों में दस साल में पूरा करना था काम, नहीं हो पाया
मास्टर प्लान में चिन्हित 139 बाद में बढ़कर 142 अस्थिर स्थानों में बसे लोगों को पुनर्वास करने के लिए 2661.73 करोड़ रुपये की मंजूरी दी. पुनर्वास का कार्य चरणवद्ध तरीके से 10 वर्षों में करने का खाका तैयार हुआ. जिसमें पहले पांच वर्ष में 1476.47 करोड़ रुपये और दूसरे पांच वर्ष में 1185.26 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान रखा गया. इस हिसाब से परियोजना का कार्य 2019 में पूरा हो जाना चाहिए था. वर्ष 2011 में डेमिग्राफिक सर्वे का काम पूरा हो गया. लेकिन अबतक सिर्फ 160 परिवारों को ही नये आवास का शिफ्ट किया गया है.
प्रोजेक्ट का खर्च 2661 करोड़ से बढ़कर पहुंचा 5200 करोड़, जिसे लेकर टकराव
वर्ष 2009 में मास्टरप्लान में 2661.73 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट कॉस्ट को लेकर कार्य शुरू हुआ. नॉडल एजेंसी के रूप में यह कार्य आसनसोल दुर्गापुर विकास प्राधिकरण (अड्डा) को करना था. वर्ष 2016 में यह कार्य राज्य हाउसिंग विभाग को सौंप दिया गया. अड्डा स्थानीय स्तर पर पूरे कार्य की निगरानी की जिम्मेवारी में रही. एनएलटीएच परिवारों को शिफ्ट करने के लिए जामुड़िया, अंडाल और बाराबनी में कुल 10,044 आवास बनाने का कार्य 2017-18 से शुरू हुआ. इस दौरान प्रोजेक्ट कॉस्ट काफी बढ़ गया था, जिसे लेकर वर्ष 2019 में इसीएल और अड्डा ने सम्मिलित रूप से मिलकर संशोधित मास्टरप्लान तैयार किया और 5200 करोड़ रुपये का नया प्रस्ताव राज्य सरकार की इंडस्ट्रियल कॉर्मस एंटरप्राइजेज (आइसीइ) को भेजा गया. आइसीइ के अधीन ही यह पूरा प्रोजेक्ट चल रहा है. यह प्रस्ताव कैविनेट अप्रूवल के बाद कोल इंडिया को भेजना था. सूत्रों के अनुसार अबतक इसपर कोई सुगबुगाहट नहीं हुई है. वहीं झरिया कोलफील्ड एरिया पुनर्वास परियोजना के लिए संशोधित मास्टर प्लान को मंजूरी मिल गयी है.
परियोजना के लिए मिले अबतक 881 करोड़ रुपये, 314 करोड़ की तत्काल जरूरत
आरसीएफए परियोजना के लिए अड्डा को 2661.73 करोड़ रुपये में से अबतक दो चरणों के 581 और 300 कुल 881 करोड़ रुपये ही मिला है. 10,044 आवासों के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए अड्डा ने दूसरे चरण में 614 करोड़ रुपये की मांग की थी, जिसमें 300 करोड़ रुपये ही मिल पाया. सूत्रों के अनुसार 314 करोड़ रुपये नहीं मिलने के कारण प्रोजेक्ट पूरा करने की गति धीमी पड़ गयी है. समय पर फंड नहीं मिलने के कारण पुनर्वास कार्य सही समय पर पूरा नहीं होने को लेकर मुख्यंमत्री ममता बनर्जी ने 17 जनवरी 2023 को कहा था कि रानीगंज कोयलांचल की हालत कहीं जोशीमठ की तरह न हो जाये.
कुछ घटनाएं जिसमें लोगों की गयी जान, मचा था भारी हंगामा
केस नम्बर 1. 17 जुलाई 1998 को सालानपुर प्रखंड के संग्रामगढ़ ओसीपी संलग्न सामडी पंचायत कार्यालय के पीछे स्थित अपनी सैलून में पोलू ठाकुर (32) रात को सोये हुए थे. भूधंसान हुई और वे जमीन के अंदर चले गये. सुबह काफी हंगामा हुआ. काफी प्रयास के बाद उनका शव निकाला गया.
केस नम्बर 2. सालानपुर प्रखंड के संग्रामगढ़ ओसीपी संलग्न रायपाड़ा इलाके के निवासी सजल राय (22) 27 फरवरी 2007 की सुबह कोलियरी परिसर में शौच करने गये. जहरीली गैस की रिसाव में वे वही दम घुटकर मर गये.
केस नम्बर 3. सालानपुर प्रखंड के संग्रामगढ़ ओसीपी संलग्न मोचीपाड़ा इलाके के निवासी भीम रुईदास की मौत 26 जून 2008 को रात को अपने घर में सोने के दौरान हो गयी. जहरीली गैस से दम घुटने को मौत का कारण माना गया.
केस नम्बर 4. कुल्टी थाना क्षेत्र के सांकतोड़िया पुलिस फांडी अंतर्गत शिशुबागान इलाके में 17 जून 2015 को हुई धंसान में हिना परवीन जमीन के अंदर समा गयी थी. वह सुबह शौच करने गयी थी. अचानक जमीन धंसी और वह उसमें समा गयी. भूगर्भिय आग के कारण शव अंदर पूरी तरह झुलस गया था. ग्यारह घंटे चले रेस्क्यू अभियान के बाद शव को निकाला गया.
केस नम्बर 5. अंडाल थाना क्षेत्र अंतर्गत जामबाद ओसीपी संलग्न इसीएल के पुराना एरिया ऑफिस के पास 20 जून 2020 मध्यरात्रि में धंसान हुई. यहां इसीएल के परित्यक्त आवास अपने परिवार के साथ रह रही एक महिला शेख शहनाज जमीन के अंदर समा गयी. 10 दिनों तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद महिला एक शव मिला था.
आरसीएफए पुनर्वास परियोजना के लिए चिन्हित संभावित 142 अस्थिर स्थान में बसे 29 हजार परिवार की सूची तैयार
नोट-थाना का नाम बोल्ड अक्षर में कृपया कर दीजिएगा
आरसीएफए पुनर्वास परियोजना के तहत पश्चिम बर्दवान जिला में 17 में से ग्यारह थाना क्षेत्र रानीगंज, जामुड़िया, आसनसोल साउथ, आसनसोल नॉर्थ, कुल्टी, हीरापुर, अंडाल, पांडवेश्वर, सालानपुर, बाराबनी और दुर्गापुर अंतर्गत 142 अस्थिर स्थानों की सूची तैयार की गयी है और वहां बसे लोगों को शिफ्ट करने के लिए डेमोग्राफिक डेटा संग्रह किया गया. जिसमें संभावित 22,668 नन लीगल टाइटल होल्डर (एनएलटीएच) और 6101 लीगल टाइटल होल्डर (एलटीएच) का नाम शामिल किया गया. इसके साथ ही कुल 222 प्रतिष्ठान (धार्मिक स्थल, स्कूल, बाजार आदि) को भी शामिल किया गया है.
रानीगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत वेस्टपाड़ा एनएसबी रोड से इस्टर्न रेलवे मेन लाइन तक एनएलटीएच 29 परिवार का, इसीएल क्वाटर्स के उत्तर में बौलहीर गांव में एलटीएच 35 व एनएलटीएच 69 परिवार का, इसीएल क्वाटर्स इलाके में 99 एलटीएच व 158 एनएलटीएच का, पॉटरी इलाके में एलटीएच छह व एनएलटीएच 44 का, ग्वाला बस्ती इलाके में 42 एलटीएच व 156 एनएलटीएच का, चकबल्लभपुर गांव में 167 एलटीएच व 451 एनएलटीएच का, संथाल बस्ती चार नम्बर इलाके में 41 एनएलटीएच का, राणाडांगा इलाके में 119 एनएलटीएच का, एक और दो नम्बर पिट के निकट छातापाथर इलाके में एक एलटीएच व 76 एनएलटीएच का, एगरा पंचयात के बीच इस्टर्न रेलवे मेन और ओल्ड एगरा इलाके में 210 एलटीएच व 495 एनएलटीएच का, गागरडांगा इलाके में 14 एनएलटीएच का, चुनाभट्ठी बस्ती इलाके में 50 एनएलटीएच का, महालीपाड़ा इलाके में 18 एनएलटीएच का, बाबूडांगा बस्ती इलाके में 81 एनएलटीएच का, कौरडी गांव में 145 एलटीएच व 253 एनएलटीएच का, कुमारबाजार कोलियरी इलाके में 243 एलटीएच व 801 एनएलटीएच का, अरुण टॉकीज इलाके में 57 एलटीएच व 233 एनएलटीएच का, पारोरबांध इलाके में 35 एलटीएच व 197 एनएलटीएच का, इसीएल क्वाटर और संथाल बस्ती इलाके में एक एलटीएच व 134 एनएलटीएच का, रटीबाटी फ्लैट बंगलो के निकट डोमपाड़ा इलाके में 111 एनएलटीएच का तथा एजेंट ऑफिस और एमटीआइ के बीच रटीबाटी इलाके में 129 एनएलटीएच परिवारों का नाम संभावित सूची में शामिल है.
जामुड़िया थाना क्षेत्र अंतर्गत संथाल बस्ती इलाके में नौ एनएलटीएच परिवार का, रानीगंज सूरी रोड के कुछ हिस्से और तपसी गांव के इलाके में 81 एलटीएच व 238 एनएलटीएच का, विवेकानंद स्कूल सरकारी कॉलोनी जीवनापाड़ा गांव इलाके में 33 एलटीएच व 512 एनएलटीएच का, हुमराडांगा इलाके में 153 एनएलटीएच का, नंदीग्राम और स्कूल इलाके में 80 एलटीएच व 273 एनएलटीएच का, धसल गांव के कुछ हिस्से और धसल बस्ती इलाके में दो एलटीएच व 75 एनएलटीएच का, केंदा गांव में 313 एलटीएच व 1178 एनएलटीएच का, सातग्राम सिम एक नम्बर इंक्लाइन इलाके में 74 एलटीएच व 227 एनएलटीएच का, भूतडोबा और शिशुधौड़ा बस्ती इलाके में चार एलटीएच व 246 एनएलटीएच का, शिबपुर गांव में 45 एलटीएच व 1056 एनएलटीएच का, इसीएल भवन, ऑफिस स्टाफ क्वाटर और दो-तीन नम्बर पिट के निकट तीन नम्बर बस्ती इलाके में 62 एलटीएच व 136 एनएलटीएच का, डोबराणा मौजा के बस्ती इलाके में 17 एलटीएच व 37 एनएलटीएच का, तीन नम्बर बस्ती इलाके में एक एलटीएच व 196 एनएलटीएच का, कुलडांगा गांव में 58 एलटीएच व 184 एनएलटीएच का, जोबा गांव में 96 एनएलटीएच का, केंदुलिया गांव में 54 एलटीएच का, श्रीपुर बाजार और बस्ती तथा स्कूल इलाके में सात एलटीएच व 308 एनएलटीएच का, छातिमडांगा इलाके में तीन एलटीएच व 226 एनएलटीएच का, जामुड़िया बाजार इलाके में 389 एलटीएच व 1163 एनएलटीएच का, परिहारपुर गांव में 127 एलटीएच व 531 एनएलटीएच का, जामुड़िया गांव में 131 एलटीएच व 2480 एनएलटीएच का और संथाल बस्ती इलाके में 71 एनएलटीएच परिवारों का नाम संभावित सूची में है.
आसनसोल साउथ थाना क्षेत्र अंतर्गत कोड़ापाड़ा इलाके में नौ एलटीएच व 49 एनएलटीएच परिवारों का, कल्ला गांव, उच्च तथा प्रायमरी स्कूल और बस्ती इलाके में 39 एलटीएच व 149 एनएलटीएच का, घुसिक कालीपाहाड़ी 15 नम्बर बस्ती इलाके में 23 एलटीएच व 414 एनएलटीएच का, कालीपहाड़ी एचपीजी कॉलोनी व बस्ती इलाके में 17 एलटीएच और 400 एनएलटीएच का, आरसीआइ कारखाना, डीबी रोड और स्कूल के उत्तर तथा दक्षिण बस्ती इलाके में 51 एलटीएच व 181 एनएलटीएच का, पलाशडीहा इलाके में 47 एलटीएच व 111 एनएलटीएच का, सराकडीह इलाके में 17 एलटीएच व 268 एनएलटीएच का, बाणसराकडीह इलाके में 84 एनएलटीएच का, नरसामुंडा इलाके में 91 एलटीएच व 468 एनएलटीएच का, फतेहपुर गांव इलाके में 35 एलटीएच व 155 एनएलटीएच का, खंखाया अपरधौड़ा इलाके में तीन एलटीएच व 109 एनएलटीएच का, उषाग्राम व अन्य इलाके में 96 एलटीएच व 406 एनएलटीएच का, रघुनाथबाटी गांव और संथाल बस्ती इलाके में 129 एलटीएच व 540 एनएलटीएच का, बराचक स्टेशन के दक्षिण में दो एलटीएच व 47 एनएलटीएच का, चर्चडांगा/नीमडांगा इलाके में 181 एनएलटीएच का, रामपुर गांव, केशवपाड़ा, मोचीडांगा, सातपुकुरिया इलाके में 76 एलटीएच व 331 एनएलटीएच का, पलाशडीहा के जयरोलडीह इलाके में 36 एनएलटीएच का, पलाशडीहा के प्रायमरी स्कूल और स्कूलडांगा बस्ती इलाके में 34 एनएलटीएच का, अपर बोरिंगपाड़ा इलाके में 49 एनएलटीएच का, हाटगारुयी के दो नम्बर पिट के निकट संथाल बस्ती इलाके में 85 एनएलटीएच का, खंखाया के रायपाड़ा इलाके में 32 एलटीएच व 69 एनएलटीएच का, वनविष्णुपुर गांव और बस्ती इलाके में 145 एलटीएच व 20 एनएलटीएच का, दयाल आश्रम, नवीनपल्ली, शालवन बस्ती, दो नम्बर पिट बस्ती इलाके में 18 एलटीएच वे 358 एनएलटीएच का, आमराकोन्दा बस्ती इलाके में 25 एनएलटीएच का, हरिपाड़ा इलाके में सात एलटीएच व 81 एनएलटीएच का, सेलरेले ऑफिसर्स कॉलोनी इलाके में 204 एनएलटीएच का, बराचक गांव इलाके में 108 एनएलटीएच का और बेलरुई गांव इलाके में 34 एनएलटीएच परिवारों का नाम संभावित सूची में है.
आसनसोल नॉर्थ थाना क्षेत्र अंतर्गत सिर्फ एक इलाका रामजीवनपुर गांव और बस्ती इलाके में दो एलटीएच व 112 एनएलटीएच परिवारों का नाम संभावित सूची में है.
कुल्टी थाना क्षेत्र अंतर्गत सांकतोड़िया गांव इलाके में 795 एलटीएच व 250 एनएलटीएच परिवारों का, छोटाधेमो गांव और बस्ती इलाके में 16 एलटीएच व 285 एनएलटीएच का, आलडी गांव और बस्ती इलाके में 152 एलटीएच व 550 एनएलटीएच का, नॉर्थ डीबी रोड इसीएल क्वाटर्स इलाके में एक एलटीएच व 11 एनएलटीएच का, राधानगर संथाल बस्ती इलाके में तीन एलटीएच व 31 एनएलटीएच का, छोटाधेमो पानकियारी गांव इलाके में 84 एलटीएच वे 31 एनएलटीएच का, शीतलपुर बस्ती इलाके में 15 एलटीएच व 141 एनएलटीएच का, राधानगर गांव व बस्ती इलाके में 155 एलटीएच व 668 एनएलटीएच का, सीआइएसएफ कैम्प और इसीएल क्वाटर इलाके में 245 एनएलटीएच का, बनधेमो बस्ती इलाके में पांच एलटीएच व 67 एनएलटीएच का, नेपाली बस्ती और बड़ाधौड़ा बस्ती इलाके में दो एलटीएच व 110 एनएलटीएच का, डीबी रोड के उत्तर में दो बस्ती और जगदीश टॉकीज के पश्चिम इलाके में 11 एलटीएच व 18 एनएलटीएच का और साबनपुर गांव इलाके में 31 एलटीएच वे 174 एनएलटीएच परिवारों का नाम संभावित सूची में है.
हीरापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत अलुठिया और बारातचक गांव इलाके में 405 एलटीएच वे 626 एनएलटीएच परिवारों का, पटमोहना गांव इलाके में 41 एलटीएच वे 220 एनएलटीएच का और वैधनाथपुर इलाके में 89 एलटीएच व 599 एनएलटीएच परिवारों का नाम संभावित सूची में है.
अंडाल थाना क्षेत्र अंतर्गत पलाशवन इलाके में 84 एलटीएच वे 629 एनएलटीएच परिवारों का, हरीशपुर गांव में 213 एलटीएच वे 413 एनएलटीएच का, हरिपुर गांव, बाजार और इसीएल क्वाटर इलाके में 194 एलटीएच व 566 एनएलटीएच का, धंडाडीही गांव इलाके में 575 एलटीएच वे 768 एनएलटीएच का, मधुसूदनपुर बाउरीपाड़ा इलाके में 31 एलटीएच व 77 एनएलटीएच का, काजोड़ा धांगरपट्टी इलाके में 182 एनएलटीएच का, परासकोल इसीएल क्वाटर, हॉस्पिटल व बस्ती इलाके में 17 एलटीएच व 635 एनएलटीएच का, बहुला मोतीबाजार और डीबी रोड इलाके में 65 एलटीएच व 700 एनएलटीएच का, मधुसूदनपुर माझी बस्ती इलाके में 21 एलटीएच वे 48 एनएलटीएच का, काजोड़ा शिकारपुकुर बस्ती इलाके में 22 एलटीएच वे 825 एनएलटीएच का, मोइरा गांव इलाके में 79 एलटीएच व 161 एनएलटीएच का, खांद्रा कैम्पपाड़ा बस्ती इलाके में 139 एनएलटीएच का, बनबहाल गांव के कुछ हिस्से में 36 एनएलटीएच का और बहुला में स्टेडियम, इसीएल भवन तथा प्रायमरी स्कूल इलाके में 238 एनएलटीएच परिवारों का नाम संभावित सूची में है.
पांडवेश्वर थाना क्षेत्र अंतर्गत बंगालपाड़ा (रिफ्यूजी बस्ती) इलाके में 78 एलटीएच वे 247 एनएललटीएच परिवारों का, इसीएल क्वाटर दालुरबांध कोलियरी इलाके में 33 एनएलटीएच का, कुमारडीही में स्कूल और इसीएल आवास के इलाके में पांच एनएलटीएच का, शंकरपुर गांव बाउरी पाड़ा इलाके में 25 एलटीएच व 69 एनएलटीएच का, दन्या गांव में 143 एलटीएच व 734 एनएलटीएच का, नवग्राम गांव मोड़ के निकट बस्ती रोड इलाके में 408 एनएलटीएच का और नतूनडांगा में फुटबॉल मैदान के निकट इलाके में सात एलटीएच व 127 एनएलटीएच परिवारों का नाम संभावित सूची में शामिल है.
बाराबनी थाना क्षेत्र अंतर्गत भनोड़ा सिन्हावाहिनी राणा बस्ती इलाके में 11 एलटीएच व 64 एनएलटीएच परिवारों का, बाराबनी गांव इलाके में 72 एलटीएच वे 77 एनएलटीएच का, मनोहरबहाल गांव इलाके में 138 एलटीएच व 77 एनएलटीएच का, माझियारा गांव इलाके में 252 एलटीएच व 743 एनएलटीएच का, भनोड़ा गांव इलाके में 151 एलटीएच व 891 एनएलटीएच का, पानुड़िया गांव इलाके ने 22 एलटीएच व 74 एनएलटीएच का, चरणपुर गांव इलाके में 29 एलटीएच वे 302 एनएलटीएच का, फरीदपुर गांव इलाके में 26 एलटीएच वे 172 एनएलटीएच का, जामग्राम संथालपाड़ा इलाके में एक एलटीएच व 86 एनएलटीएच का और जामग्राम गांव/वैष्णवपाड़ा इलाके में 39 एलटीएच व 25 एनएलटीएच का नाम संभावित सूची में शामिल है.
सालानपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत सामडी मोचीपाड़ा इलाके में 45 एलटीएच व 115 एनएलटीएच परिवारों का, सालानपुर में मेन लाइन के निकट पश्चिम ओर बी सिम पिट के पास संथाल बस्ती इलाके में तीन एलटीएच व 78 एनएलटीएच का, बनबीडी गांव इलाके में 63 एलटीएच व 290 एनएलटीएच का, आलकुशा गांव इलाके में 99 एलटीएच व 275 एनएलटीएच का और सालानपुर संथाल बस्ती इलाके में 33 एनएलटीएच परिवारों का नाम संभावित सूची में शामिल है.
दुर्गापुर थाना क्षेत्र में लावदोहा पुलिस फांडी अंतर्गत एकमात्र सरपी बस्ती में 46 एनएलटीएच परिवारों का नाम संभावित सूची में शामिल है.
एनएलटीएच को 38.92 वर्ग मीटर का मिल रहा है एक-एक फ्लैट, नहीं जा रहे लोग
पहले चरण में 22,668 एनएलटीएच परिवारों को शिफ्ट करने के लिए चार जगहों पर 10,044 आवास बनाया जा रहा है. एक पूरी कॉलोनी बसायी जा रही है. जहां सभी परिवार को 38.92 वर्ग मीटर का फ्लैट दिया जा रहा है. अधिकांश परिवार यहां जाने से कतरा रहे हैं. इनमें से 90 फीसदी परिवार किसी न किसी कोलियरी संलग्न इलाके में रहते हैं. यहां उन्हें नियमित रोजगार का साधन मिल जाता है. नये आवासों में जाने पर रोजगार की बड़ी समस्या खड़ी हो रही है. जिसके कारण वे नए आवासों में जाने से कतरा रहे हैं.
142 अस्थिर स्थानों में से 126 की पुनर्वास की प्रक्रिया को लेकर कार्य जारी, दो जगहों का लोगों ने किया विरोध
आरसीएफए पुनर्वास परियोजना के लिए भूमिगत आग और धंसान प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे दो अलग-अलग समय मे जेवियर इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल सर्विस रांची और हिजली इंस्पिरेशन संस्था ने किया था. सर्वे में 142 अस्थिर स्थानों को सूची में शामिल किया. जिसमें से जिसमें से 126 स्थानों पर पुनर्वास को लेकर कार्य चल रहा है. बाकी के 16 स्थानों में से दो जगहों पर स्थानीय लोगों ने पुनर्वास का विरोध किया है. जिसमें आसनसोल साउथ थाना क्षेत्र में घुसिक मौजा में तीन नम्बर बस्ती (11 और 12 नम्बर पिट) इलाका और पांडवेश्वर थाना क्षेत्र अंतर्गत गोविंदपुर मौजा में गोविंदपुर गांव व बस्ती के लोगों ने इसका विरोध किया. जिलाधिकरी ने भी इस इलाके में जाकर लोगों से बात करने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने. जिसके कारण जगह की नापी नहीं हो पायी और यह इलाका पुनर्वास सूची से बाहर है. रानीगंज थाना क्षेत्र में बेलियाबथान मौजा में संथाल बस्ती नम्बर एक इलाका, बेलियाबथान गांव का कुछ हिस्सा, निमचा मौजा में मल्लिक बस्ती इलाका, बाराबनी थाना क्षेत्र में मनोहरबहाल मौजा में माझीपाड़ा इलाका, जामग्राम मौजा में स्टील रिफैक्टरी इलाका, बंगाल रिफैक्टरी इलाका, सालानपुर थाना क्षेत्र के सालानपुर मौजा में बालसुख सिरामिक कॉलोनी, जामुड़िया थाना क्षेत्र अंतर्गत बेनाली मौजा में जयश्री सिरामिक्स इलाका, आसनसोल साउथ थाना क्षेत्र अंतर्गत सुईडी मौजा में चंद्रचूड़ मंदिर और राधानगर मौजा में सोदपुर वर्क्स शॉप कुल दस इलाकों में अवादी नहीं है. रानीगंज थाना क्षेत्र के मुर्गाथॉल निमचा मौजा में स्थित इसीएल आवासों को, जामुड़िया थाना क्षेत्र के मीठापुर मौजा में स्थित सातग्राम सिम एक नम्बर इंक्लाइन इलाके के आवासों को और पांडवेश्वर थाना क्षेत्र के छत्तीसगोंडा मौजा में श्यामला कोलियरी में इसीएल आवासों को इसीएल प्रबंधन ने शिफ्ट कर दिया है. आसनसोल साउथ थाना क्षेत्र अंतर्गत काली पहाड़ी मौजा में स्थित कालीपहाड़ी गिरमिट भूतडोबा बस्ती का नाम दो बार शामिल हो गया है. इस प्रकार 142 में से कुल 16 स्थान हट गये. 126 में पुनर्वास को लेकर कार्य चल रहा है.





0 टिप्पणियाँ