रांनीगंज-शहीद आजम भगत सिंह की 115वीं जयंती पर यह सवाल उठना लाजमी है कि भगत सिंह कौन थे . आज की पीढ़ी को यह जानना चाहिये. भगत सिंह को इतिहास में कई जगहों पर चरमपंथी भी करार दिया गया है जो वास्तविकता से परे है.बुधवार को रानीगंज के पंजाबी मोड़ पर भगत सिंह की आदमकद प्रतिमा के नीचे उनके जन्मदिन पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह बातें सामने आईं . पंजाबी मोड़ गुरुद्वारा सिख संगत संगठन के सदस्यों ने शहीद ए आज़म की याद में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जहां उनको श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए. समाज के गणमान्य लोगों ने भगत सिंह को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को याद किया .इस कार्यक्रम में रानीगंज विधायक तापस बनर्जी ने विशेष रूप से शिरकत की . उनका कहना था कि इंकलाब जिंदाबाद शब्द का दुरुपयोग किया गया है. कई मामलों में इस शब्द का प्रयोग उत्पीड़न को संदर्भित करने के लिए किया जाता है जो कि यह सही नहीं है.
तापस बनर्जी ने कहा कि शहीद भगत सिंह किसी परिचय का मोहताज नहीं है, भगत सिंह एक शहीद देशभक्त थे ,देश की आजादी में महात्मा गांधी से कम इनकी भूमिका नहीं रही है . देश के लिए वह हंसते -हंसते फांसी पर चढ़ गए ,लेकिन समझौता नहीं किए. उनकी जीवन गाथा से हर लोग अवगत हैं, उन्हें बहुत पहले ही शहीद का दर्जा मिल जाना चाहिए था जो आज मांग की जा रही है .उन्होंने कहा कि किस कारणों से उन्हें शहीद का दर्जा नहीं मिला इस विवाद में मैं नहीं जाना चाहता लेकिन यह मांग सार्थक है और इस मांग के साथ हम भी हैं.
सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से तजेंद्र सिंह ने कहा कि आज के इस कार्यक्रम के माध्यम से देश वासियों की ओर से यह मांग करते हैं कि शहीद भगत सिंह को शहीद का दर्जा अब तक क्यों नहीं मिला वह मिलना चाहिए ,उनके परिवार को शहीद का परिवार कहलाने का हक मिलना चाहिए एवं पाठ्यक्रम में शहीद भगत सिंह का इतिहास की जानकारी देनी चाहिए. इसके लिए हम लोग सरकार के सामने यह प्रस्ताव लाएंगे एवं इस प्रस्ताव के समर्थन में पूरा देश एक होगा.पंजाबी मोड़ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से सरदार इंदर सिंह ने कहा कि आज जो सवाल इस मंच से उठाया गया है इसका हम लोग समर्थन करते हैं और हम लोग सरकार को बाध्य कर देंगे इन मांग को मानने के लिए.
इस अवसर पर रानीगंज टीएमसी ब्लॉक के अध्यक्ष रूपेश यादव , आसनसोल सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सलाहकार तरसेम सिंह, चेयरमैन हरजीत सिंह बग्गा, सिख वेलफेयर सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष सुरजीत सिंह मक्कड़, बराकर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार जोगिंदर सिंह, रानीगंज गुरुद्वारा के अध्यक्ष बलजीत सिंह बग्गा, परवलिया गुरुद्वारा के अध्यक्ष सरदार मलकीत सिंह, पाली सिंह, अंडाल गुरुद्वारा के अध्यक्ष सरदार हरदेव सिंह, शिक्षक हरिशंकर तिवारी, चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अरुण भरतिया, दयाशंकर सिंह आरपी खेतान, पार्षद शहजादा खान एवं ज्योति सिंह प्रमुख थे.कार्यक्रम का संचालन रविंद्र सिंह ने किया.



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