श्री श्याम बाल मंडल का 41वां स्थापना दिवस और श्याम मंदिर का द्वितीय पाटोत्सव शुरू; डमरू वादन और नृत्य रहे आकर्षण का केंद्र
रानीगंज-देवनगरी रानीगंज की पवित्र धरा गुरुवार को 'हारे के सहारे' बाबा श्याम के जयकारों से गुंजायमान हो उठी. अवसर था श्री श्याम बाल मंडल चैरिटेबल ट्रस्ट के 41वें स्थापना दिवस और श्री श्याम मंदिर के द्वितीय स्थापना महोत्सव का. इस उपलक्ष्य में गुरुवार को सि आर रोड स्थित श्री श्री सीताराम जी मंदिर प्रांगण से एक विशाल एवं अलौकिक निशान शोभायात्रा निकाली गई.
भक्ति और कला का अनूठा संगम
गुरुवर श्यामलीन पं. काशीरामजी शर्मा एवं श्रद्धेय कुलभूषणजी शर्मा के पुण्याशीर्वाद और श्री हजारीमलजी सेनी व श्री गौरवजी शर्मा के पावन सान्निध्य तथा गौरव शर्मा की उपस्थिति में आयोजित इस यात्रा में भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था. यात्रा का मुख्य आकर्षण उज्जैन महाकाल की महाआरती फेम लालजी पांडेय का डमरू वादन रहा.इसके साथ ही कोलकाता से आए राधा-कृष्ण के नृत्य, ओडिशा के केरल बैंड और रामगढ़ के सुनामी बैंड की प्रस्तुतियों ने राहगीरों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
511 निशानों के साथ नगर परिभ्रमण
शोभायात्रा में पुरुष और महिला भक्त हाथों में बाबा श्याम के 511 रंग-बिरंगे निशान (ध्वज) लेकर चल रहे थे.श्री सीताराम जी मंदिर से शुरू होकर यह यात्रा मारवाड़ी पट्टी, तिलक रोड, बड़ा बाजार, थाना रोड, शिशु बागान और नेताजी सुभाष बोस रोड होते हुए एस.एस.बी. रोड स्थित श्री श्याम मंदिर पहुंची. रास्ते भर भक्तों ने अबीर-गुलाल उड़ाकर और भजनों पर थिरकते हुए बाबा श्याम के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की.
आगामी कार्यक्रम: भजनों और सुंदरकांड की बहेगी गंगा
संस्थापक ट्रस्ट के सदस्य अरुण राजपुरिया ने बताया कि यह त्रिदिवसीय महोत्सव 31 जनवरी तक चलेगा कार्यक्रम के तहत 29 जनवरी (शाम 5:00 बजे) एकादशी के अवसर पर श्री सागर शर्मा (गुड़गांव) द्वारा कीर्तन ततपश्चात प्रसाद,30 जनवरी (सुबह 11:00 बजे) श्री बालाजी सत्संग समिति, कोलकाता द्वारा सुंदरकांड और हनुमान चालीसा पाठ नन्दूजी पेरीवाल की जाएगी शाम 7:00 बजे निविता शर्मा द्वारा माँ राणी सती दादी का भव्य कीर्तन तथा31 जनवरी (दोपहर 3:00 बजे)को लव अग्रवाल, हर्षिता डिडवानिया और अंजली द्विवेदी (बरेली) द्वारा भजनों की अमृत वर्षा की जाएगी.
आयोजन को सफल बनाने में ट्रस्ट के अध्यक्ष विष्णु सराफ, सचिव पवन केजरीवाल, कोषाध्यक्ष बिनोद बंसल, अरुण राजपुरिया, बिमल सराफ सहित समस्त ट्रस्टीगण, संस्था के सदस्यों और स्थानीय भक्तों की अहम भूमिका रही.मंदिर परिसर को फूलों और रोशनी से भव्य रूप में सजाया गया है.

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