करोड़ों का रैन बसेरा, फिर भी खुले आसमान नीचे रात बिताने को मजबूर गरीब

आसनसोल नगर निगम की लापरवाही: रानीगंज के हुसैन नगर में 2020 साल से तैयार 'शेल्टर होम' पर लटका है ताला



रानीगंज: कड़ाके की ठंड और 12 से 14 डिग्री के गिरते पारे के बीच आसनसोल नगर निगम क्षेत्र में मानवता शर्मसार हो रही है. एक तरफ गरीब और बेघर लोग सड़कों पर ठिठुरने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ रानीगंज के हुसैन नगर (वार्ड संख्या 88) में जनता की गाढ़ी कमाई से बना करोड़ों का तीन मंजिला 'रैन बसेरा' (शेल्टर होम ) प्रशासनिक उदासीनता के कारण सफेद हाथी साबित हो रहा है.


विपक्ष ने घेरा: चैताली तिवारी ने उठाए सवाल

आसनसोल नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा पार्षद चैताली तिवारी ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया के जरिए निगम प्रशासन को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने पोस्ट साझा करते हुए कहा कि जब लोग इस जानलेवा ठंड में सड़कों पर रात गुजारने को बेबस हैं, तब सरकारी पैसे से बना रैन बसेरा बंद रहना व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है.


उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि"वर्षो पहले बनकर तैयार हुए इस शेल्टर होम को तुरंत जनता के लिए खोला जाए.इसका निर्माण जनता के टैक्स के पैसे से हुआ है, ताकि आपातकालीन स्थिति और ठंड में बेघरों को छत मिल सके."


2017 से अधर में लटका है प्रोजेक्ट

ज्ञात हो कि वर्ष 2017 में एनुयूएलएम प्रोजेक्ट के तहत कुल्टी, आसनसोल, रानीगंज और जामुड़िया में शेल्टर फॉर अर्बन होमलेस (रैन बसेरा) का निर्माण शुरू हुआ था.रानीगंज के हुसैन नगर में अत्याधुनिक 50 बेड़ो का यह रेन बसेरा,रात में ठहरने के लिए बनाया गया था. इसका मुख्य उद्देश्य विशेष कर चक्र वाती तूफान या अन्य आपदाओं के समय बेघर लोगों को सुरक्षित आश्रय देना था.हैरानी की बात यह है कि आसनसोल नगर निगम के मेयर विधान उपाध्याय द्वारा वर्चुअल उद्घाटन किए जाने के बावजूद, रानीगंज का यह केंद्र अब तक क्रियान्वित नहीं हो सका है.


असामाजिक तत्वों का बना अड्डा

सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि माकपा नेता अरिज जलिश भी इस मुद्दे पर लंबे समय से मुखर हैं. उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि करोड़ों की लागत से बनी यह इमारत अब असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गई है.भवन बंद होने के कारण वहां अनैतिक गतिविधियां हो रही हैं.प्रशासनिक अनदेखी के कारण जनता के धन का खुलेआम अपव्यय हो रहा है.उनका कहना है कि इसे संचालित करने के लिए कोलकाता के एक एनजीओ को दिया गया है,पर यह चालू नही है,हो सकता है कि कागज कलम में यह चालू हो कर चल रही हो.


प्रशासन का पक्ष एनजीओ की सुस्ती ने बढ़ाई मुश्किल

जब इस मामले में रानीगंज बोरो चेयरमैन मुजम्मिल शहजादा से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि यह रैन बसेरा अभी तक शुरू नहीं हो पाया है उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा, "रानीगंज के इस शेल्टर होम के संचालन की जिम्मेदारी कोलकाता की एक स्वयंसेवी संस्था को दी गई है.


 लेकिन संस्था ने अभी तक इसे शुरू करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है." उन्होंने आगे बताया कि आसनसोल और कुल्टी के सेफ हाउस नगर निगम खुद चला रहा है, इसलिए वहां लोग रह रहे हैं.अगर यहां का भी चलाने की जिम्मेदारी नगर निगम को दी जाती तो सुचारू रूप से चलती. रानीगंज के ताले जल्द खुलवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।


अब सवाल यह उठता है कि क्या किसी संस्था की सुस्ती के कारण गरीबों को कड़ाके की ठंड में मरने के लिए छोड़ दिया जाएगा? नेता प्रतिपक्ष के हस्तक्षेप के बाद अब देखना यह है कि मेयर विधान उपाध्याय और नगर निगम प्रशासन इस दिशा में कितनी जल्दी कार्रवाई करता है.

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