"मानवता के रक्षक": रानीगंज में गुरु तेग बहादुर सिंह जी के 350वें शहादत दिवस पर भावपूर्ण संगोष्ठी



रानीगंज- गुरु तेग बहादुर सिंह जी के 350वें शहादत दिवस के अवसर पर रानीगंज के लायंस क्लब सभागार में गुरुवार को एक भावपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका शीर्षक "मानवता के रक्षक" था. इस संगोष्ठी का उद्देश्य सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर साहिब जी के जीवन, शिक्षाओं और धर्म तथा मानवता की रक्षा के लिए दिए गए उनके अद्वितीय बलिदान को याद करना और वर्तमान पीढ़ी को उससे अवगत कराना था.


 इतिहास की उपेक्षा पर चिंता

संगोष्ठी में पश्चिम बंगाल सरकार के हिंदी अकादमी के मनोज यादव ने मुख्य रूप से अपने विचार रखे. उन्होंने इस बात पर गहरा अफसोस व्यक्त किया कि गुरु तेग बहादुर सिंह जी के बारे में हमारे इतिहास के पन्नों में तभी उल्लेख मिलता है जब हम औरंगजेब का इतिहास पढ़ते हैं.उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने समृद्ध इतिहास को भूलाने का प्रयास किया जा रहा है.गुरु तेग बहादुर सिंह जी का चरित्र और उनका जीवन इतिहास के पन्नों में पढ़ाए जाने वाले अंशों से कहीं अधिक व्यापक था. हमें इसे गहराई से समझने की आवश्यकता है, तभी हम इतिहास को सही तरीके से समझ पाएंगे,


उन्होंने कहा कि ब्रूनो और गैलीलियो ने सत्य के लिए लड़ी,वही गुरु तेग बहादुर ने धर्म की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया था. उन्होंने आज की पीढ़ी द्वारा सोशल मीडिया से इतिहास बोध प्राप्त करने पर चिंता व्यक्त करते हुए आगाह किया कि सही इतिहास को न पढ़ने पर हमारा वर्तमान और भविष्य सही दिशा में नहीं जा पाएगा.


धार्मिक स्वतंत्रता और बलिदान की सार्थकता

पंजाब से आए मुख्य वक्ता ज्ञानी परमपाल सिंह सभरा ने गुरु तेग बहादुर सिंह जी के जीवन और कार्यों पर विस्तृत प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि गुरु जी ने हमेशा धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्ति के अपने मन के अनुसार धार्मिक आस्था के पालन के अधिकार की रक्षा के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया.


उन्होंने सत्ता की मानसिकता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भले ही आज सत्ताधीशों में परिवर्तन हुआ है, लेकिन सत्ता में बैठे लोगों की मानसिकता में कोई खास बदलाव नहीं आया है. उन्होंने दृढ़ता से कहा कि जब तक यह मानसिकता परिवर्तित नहीं होगी, तब तक गुरु तेग बहादुर सिंह जी की शहादत को वास्तविक सार्थकता नहीं मिलेगी. ज्ञानी जी ने इस तरह के संगोष्ठियों के आयोजन को बहुत आवश्यक बताया, क्योंकि ये हमें इतिहास को सही तरीके से समझने और महापुरुषों के बलिदान का सही मूल्यांकन करने में सहायता करते हैं.


इस सिंपोजियम में रानीगंज टीडीबी कॉलेज की प्रोफेसर डॉक्टर शाबरा हिना खातून,रांची कॉलेज के रिटायर्ड प्रोफेसर हरमिंदर वीर सिंह,गुरु गोविंद सिंह स्टडी सर्किल के गुरविंदर सिंह ने गुरु तेग बहादुर जी के अदम्य साहस, निस्वार्थ बलिदान और शिक्षाओं पर अपने बहुमूल्य विचार प्रस्तुत किए.


वक्ताओं ने गुरु तेग बहादुर साहिब के बलिदान को न केवल अनगिनत व्यक्तियों की पंथिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया.

सरदार रविंदर सिंह ने इस सिंपोजियम के आयोजन को गुरु तेग बहादुर जी के जीवन और शिक्षाओं को याद करने और उनके आदर्शों को अपनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया.


इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार हरजीत सिंह बग्गा, महासचिव बलजीत सिंह, कोषाध्यक्ष सरदार हरजीत सिंह वाधवा, सुरेंद्र सिंह मंच पर आसीन थे. संगोष्ठी का सफल आयोजन गुरु तेग बहादुर जी के महान आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास रहा.

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