रानीगंज- आदिवासी समुदाय की पारंपरिक संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से रानीगंज कोयलांचल के बाँसड़ा एसटीडी क्लब ने वीर स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की 151वीं जयंती को भव्य तरीके से मनाया.पिछले चार वर्षों की तरह, इस वर्ष भी बाँसड़ा फुटबॉल मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में पारंपरिक संस्कृति का अद्भुत समागम देखने को मिला.
पारंपरिक तीरंदाजी प्रतियोगिता का आयोजन
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पारंपरिक तीरंदाजी प्रतियोगिता रहा, जिसने दर्शकों को खासा उत्साहित किया. प्रतियोगिता में पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों बिहार और झारखंड से भी बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. पुरुषों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी इस प्रतियोगिता में भाग लिया, जो उनके पारंपरिक कौशल और आत्मविश्वास को दर्शाता है. इस पारंपरिक आयोजन को बनाए रखने के लिए वर्तमान पीढ़ी के उच्च शिक्षित छात्र-छात्राओं के साथ-साथ कई कॉलेज प्रोफेसर और शिक्षणकर्मी भी उपस्थित रहे.
जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए आदिवासी नृत्य दलों के कलाकारों ने अपनी मातृभाषा में गीत प्रस्तुत किए और धामसा-मादल की पारंपरिक थाप पर मनमोहक नृत्य कर दर्शकों का मन मोह लिया. यह आयोजन जनजाति समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण बना.
बच्चों के लिए 'शिशु उद्यान' का शिलान्यास
इसी कार्यक्रम के बीच, बाँसड़ा मैदान को बच्चों के खेलकूद के लिए एक आदर्श स्थान के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया इस मैदान में 'शिशु उद्यान' बनाने का औपचारिक शिलान्यास किया गया. रानीगंज की पूर्व विधायक रुनु दत्त,आमरासोता ग्राम पंचायत प्रधान संजय हेम्ब्रम और युवा सदस्य दशरथ कोड़ा ने नारियल फोड़कर इस उद्यान निर्माण की औपचारिक शुरुआत की. जानकारी के अनुसार, इस शिशु उद्यान को प्रारंभिक स्तर पर विकसित करने के लिए ग्राम पंचायत की ओर से 1 लाख 70 हजार रुपये आवंटित किए गए हैं. यह पार्क वित्तीय वर्ष 2025-2026 के शुरू होने से पहले बनकर तैयार हो जाएगा, जिससे क्षेत्र के बच्चों को खेलने के लिए एक सुरक्षित और बेहतर स्थान मिलेगा.











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