मालदा, पश्चिम बंगाल (पीबी टीवी): मालदह-पश्चिम बंगाल के मालदा ज़िले के हरीशचंद्रपुर थाना अंतर्गत नारायणपुर इलाके में एक कथित तृणमूल नेता और सिविक वॉलंटियर पर अपहरण, फिरौती की मांग और दुकान में आग लगाने के गंभीर आरोप लगने से इलाके में सनसनी फैल गई है। इस घटना को लेकर तृणमूल और भाजपा के बीच तीखा राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
नारायणपुर निवासी गोलाम रसूल की शादी कुछ महीने पहले बिहार के पूर्णिया की रिजवाना परवीन के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही दोनों के बीच विवाद चल रहा था। इसी वैवाहिक विवाद को सुलझाने के लिए 23 अगस्त को लड़की के मायके में एक सालिशी सभा (पंचायत बैठक) बुलाई गई, जिसमें तृणमूल पंचायत सदस्या के पति और हरीशचंद्रपुर थाने के सिविक वॉलंटियर तारीक अनवर ने मध्यस्थता की कोशिश की।
लेकिन समझौता न होने पर, आरोप है कि गोलाम रसूल को "थाने ले जाने" के बहाने जबरन उठाकर ले जाया गया, यानी उसका अपहरण किया गया। इसके लिए तारीक अनवर समेत लड़की के परिजनों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज हुआ। बिहार पुलिस ने बाद में गोलाम रसूल को पूर्णिया से बरामद किया।
फिर शुरू होता है दबाव और धमकी
गोलाम रसूल और उसके परिवार का आरोप है कि एफआईआर से तारीक अनवर का नाम हटाने के लिए बार-बार दबाव और धमकियां दी जा रही थीं। जब परिवार ने झुकने से इनकार कर दिया, तो मंगलवार रात को गोलाम और उसके भाई की कॉस्मेटिक दुकान में पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई।
परिजनों का आरोप है कि घटना से पहले तारीक ने फोन कर "बड़ा नुकसान" करने की धमकी दी थी, और उसी ने दुकान में आग लगवाई। तारीक अनवर पर यह भी आरोप है कि वह राज्य के मंत्री और स्थानीय विधायक ताजमुल हुसैन का नाम लेकर धमकी देता है और इसी राजनीतिक पहुंच के चलते पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर रही।
आरोपी का पक्ष और राजनीतिक बयानबाज़ी
तारीक अनवर ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि यह उसके खिलाफ एक सोची-समझी साजिश है। उसने खुद को न अपहरण में शामिल बताया, न ही आगजनी में।
हालांकि उसकी मंत्री ताजमुल हुसैन के साथ तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिससे विपक्ष को हमला करने का मौका मिल गया है।
मंत्री ताजमुल हुसैन ने बयान दिया है कि “आरोप लगना सामान्य बात है, लेकिन उसके लिए सबूत जरूरी है। बाकी का काम पुलिस करेगी।”
भाजपा का हमला
भाजपा ने इस घटना को लेकर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने कहा है कि “राज्य में अब कानून का नहीं, तालिबानी राज चल रहा है। तृणमूल के खुद के कार्यकर्ता भी सुरक्षित नहीं हैं।”
तृणमूल की सफाई
हालांकि तृणमूल जिला नेतृत्व ने इस मामले में कोई सीधा पक्ष नहीं लिया है, लेकिन कहा है कि “प्रशासन पार्टी देखकर काम नहीं करता” और वे पूरे मामले की जांच करवाने का आश्वासन दे रहे हैं।


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