बांकुड़ा के ब्लॉक नंबर 1 स्थित ढगड़िया प्राथमिक विद्यालय में कुल पाँच कक्षाओं में पढ़ने वाले 76 छात्रों के लिए मात्र दो शिक्षक नियुक्त हैं। स्कूल भवन की हालत भी दयनीय है — तीन जर्जर कक्षाओं में जैसे-तैसे पढ़ाई चल रही है। पेयजल से लेकर शौचालय तक, हर स्तर पर आधारभूत संरचना की भारी कमी है। लेकिन इन सभी समस्याओं से भी बड़ी समस्या इस बरसात के मौसम में सामने आई है — स्कूल तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता पूरी तरह कीचड़ से ढका हुआ है, जिससे स्कूल आना-जाना बच्चों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
यह स्थिति बांकुड़ा ब्लॉक नंबर 1 के केंजाकुड़ा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले ढगड़िया प्राथमिक विद्यालय की है। राज्य सरकार के बदलाव के बाद प्राथमिक स्कूलों के छात्रों को यूनिफॉर्म के साथ-साथ जूते, छाता, बैग आदि देने की शुरुआत हुई थी। उसी योजना के तहत इस स्कूल के 76 छात्रों को भी जूते मिले हैं। लेकिन स्कूल का रास्ता इतना खराब है कि वे सरकारी जूते पहन ही नहीं सकते। मजबूरन बच्चे जूते घर की दहलीज पर टांग कर, पैरों में चप्पल पहन कर स्कूल आते हैं।
हालात ऐसे हैं कि सिर्फ बारिश के दिनों में ही नहीं, साल के करीब आधे वक्त तक बच्चे चप्पल भी पैरों से निकालकर हाथ में लेकर चलते हैं। किसी सर्कस के करतब की तरह संतुलन बनाते हुए जैसे-तैसे स्कूल पहुंचना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। इसका मुख्य कारण है गांव से स्कूल तक के कुछ सौ मीटर लंबे रास्ते की बदतर हालत।
गांव की मुख्य सड़क पक्की कर दी गई है क्योंकि उस रास्ते पर बड़ों का आना-जाना होता है, और बड़ों के पास वोट होता है। लेकिन छोटे बच्चे तो वोटर नहीं हैं, इसलिए उनकी समस्याओं की परवाह किसे है? यही कारण है कि स्कूल का रास्ता आज तक पक्का नहीं किया गया, न ही शिक्षक संख्या बढ़ाने, पीने के पानी की व्यवस्था करने, कक्षाओं की मरम्मत या शौचालय निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया है।
बीते एक दशक से ज्यादा समय से बच्चों को इसी तरह जोखिम उठाकर स्कूल जाना पड़ रहा है। लेकिन अब आखिरकार इलाके के अभिभावकों की नींद टूटी है। उन्होंने स्कूल की सड़क पक्की करने और आधारभूत सुविधाएं दुरुस्त करने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। स्थानीय लोगों ने स्कूल में ताला लगाकर विरोध प्रदर्शन किया।
अभिभावकों के आंदोलन के बाद पुलिस हरकत में आई और जल्द ही सड़क बनाने का आश्वासन भी दिया गया। लेकिन इलाके के बीजेपी विधायक सवाल उठा रहे हैं कि क्या ‘कटमनी’ (घूस) के शासन में वास्तव में स्कूल तक पक्की सड़क बनेगी? वहीं, बांकुड़ा जिला परिषद का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन अब वे इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई करेंगे।

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