बांकुड़ा: बांकुड़ा जिले के ओंदा ब्लॉक के पाथर पुकुर गांव में दुर्लभ बीमारी कालाज़ार का एक मामला सामने आया है। इस गांव में लगभग 25 से 30 आदिवासी परिवार रहते हैं। इन्हीं में से एक 50 वर्षीय व्यक्ति के शरीर में इस बीमारी की पुष्टि हुई है, जिससे स्वास्थ्य विभाग में चिंता बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार, यह व्यक्ति लंबे समय से बुखार से पीड़ित था। जांच में उसके खून के सैंपल में कालाज़ार की पुष्टि हुई। फिलहाल मरीज का इलाज ओंदा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में चल रहा है।
बांकुड़ा के उप-मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी देबव्रत दास ने बताया,
"कालाज़ार का संक्रमण सैंडफ्लाई नामक विशेष प्रजाति की मक्खी के काटने से फैलता है। यह रोग आमतौर पर बांकुड़ा में नहीं पाया जाता। मरीज कैसे संक्रमित हुआ, इसकी जांच की जा रही है।"
उन्होंने आगे कहा कि मरीज के गांव के कुछ अन्य लोगों के खून के सैंपल की जांच की गई, लेकिन किसी में संक्रमण नहीं मिला। मरीज के परिवार ने बताया कि हाल ही में वह व्यक्ति दूसरे राज्य में अपने रिश्तेदारों के घर गया था। स्वास्थ्य विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि कहीं वहीं से तो संक्रमण नहीं हुआ।
अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस तरह डेंगू और मलेरिया मच्छरों के जरिए फैलते हैं, उसी तरह कालाज़ार सैंडफ्लाई के जरिए फैलता है। यह कोविड की तरह ड्रॉपलेट्स से नहीं फैलता।
स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम ने गांव में जाकर लोगों के सैंपल लेने का काम शुरू कर दिया है। अब तक किसी और में यह रोग नहीं मिला है, लेकिन गांव में इस बीमारी के आने से विभाग और ग्रामीणों में डर का माहौल है।

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