बशीरहाट-अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय झींगा मछली उत्पादों पर आयात शुल्क 25% से बढ़ाकर 50% करने की घोषणा ने पश्चिम बंगाल के बशीरहाट इलाके में झींगा व्यवसाय से जुड़े लाखों लोगों के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। यह कदम क्षेत्र के मछुआरों, व्यापारियों, निर्यातकों और श्रमिकों की आजीविका पर सीधा असर डाल रहा है।
भारत के कुल झींगा निर्यात का 25% हिस्सा बशीरहाट से आता है, जिसका एक बड़ा बाजार अमेरिका है। इस क्षेत्र से हर हफ्ते करोड़ों रुपये के बागदा, गलदा और वैनामी प्रजाति के झींगे मछली अमेरिका भेजे जाते हैं। आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी के कारण अब इस व्यापार में भारी नुकसान की आशंका है, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 5 से 8 लाख लोगों की आजीविका खतरे में पड़ गई है।
व्यापार पर चौतरफा संकट
बशीरहाट के मालंच, हसनाबाद, सरबेड़िया, इटिंडा, तेतुलिया और शारापुल जैसे क्षेत्रों में हजारों व्यापारी इस व्यवसाय पर निर्भर हैं। स्थानीय निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका की देखा-देखी अन्य देश भी शुल्क बढ़ाने की योजना बना सकते हैं, जिससे उनका व्यापार पूरी तरह से ठप हो सकता है।
पहले 8.2% का निर्यात शुल्क अब 50% तक बढ़ गया है। इसके अलावा, भारत को अमेरिकी बाजार में इक्वाडोर से कड़ी टक्कर मिल रही है, जहाँ उत्पादकों पर सिर्फ 15% शुल्क लगता है। इस कारण इक्वाडोर के उत्पाद भारत के मुकाबले सस्ते हैं, जिससे अमेरिकी बाजार में भारत की पकड़ कमजोर हो रही है।
कर्ज में डूबे किसानों की परेशानी
झींगा की खेती करने वाले कई किसानों ने बैंक और निजी संस्थाओं से कर्ज लेकर निवेश किया था। निर्यात में आई इस रुकावट ने उनके सामने आर्थिक संकट और कर्ज चुकाने की चुनौती खड़ी कर दी है। एक स्थानीय व्यापारी के अनुसार, इस नुकसान से उनकी कमर टूट गई है।
अब व्यापारी केंद्र सरकार से इस संकट को सुलझाने के लिए हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। यदि जल्द ही यूरोप या पूर्वी एशिया जैसे वैकल्पिक बाजारों की तलाश नहीं की गई, तो बशीरहाट का यह उद्योग पूरी तरह से बर्बाद हो सकता है।

0 टिप्पणियाँ